कोलडैम से शिमला तक पानी लाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की द सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड इनवायरमेंट इंजीनियरिंग आर्गेनाइजेशन (सीपीएचईईओ) कमेटी ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूर कर लिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से 377 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था।
यह परियोजना राजधानी के लिए अब तक की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना साबित होगी। इससे शहर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की प्यास बुझने की उम्मीद जताई जा रही है। राजधानी के लोगों की प्यास बुझाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से दो योजनाएं बनाई गई थी। इसमें कोलडैम और पब्बर योजना शामिल थी।
जहां मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व्यक्तिगत तौर पर कोलडैम के पक्ष में थे, वहीं आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स पब्बर पेयजल योजना को बनवाना चाहती थी। इस मामले में मुख्यमंत्री को कैबिनेट की सब कमेटी भी गठित करनी पड़ी थी। हालांकि उस कमेटी की जरूरत नहीं पड़ी।
बाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोलडैम पेयजल योजना को ही केंद्र को भेजा गया। इस प्रोजेक्ट को केंद्र की द सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड इनवायरमेंट इंजीनियरिंग आर्गेनाइजेशन ने सैद्धांतिक तौर पर मंजूर कर दिया है। यह केंद्र की तकनीकी कमेटी है। हालांकि अभी वित्तीय स्वीकृति मिलनी शेष है।
कोलडैम पेयजल योजना से प्रदेश की राजधानी शिमला को 40 एमएलडी पानी मिलेगा। इससे न केवल शिमला बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी पेयजल की समस्या से निजात मिल जाएगी।