फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: मुख्यमंत्री ने विशेष बच्चों के लिए मोबाइल रिसोर्स सेंटर को हरी झंडी दिखाई

Mon, 31 Aug 2026 06:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए तीन मोबाइल रिसोर्स सेंटर-थेरेपी ऑन व्हील्स वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 
विज्ञापन
सीएम सुक्खू ने मोबाइल रिसोर्स सेंटर-थेरेपी ऑन व्हील्स वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए तीन मोबाइल रिसोर्स सेंटर-थेरेपी ऑन व्हील्स वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल समावेशी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को विशेष थेरेपी और पुनर्वास सुविधाएं मिलेंगी। यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा के समावेशी शिक्षा घटक के तहत सैंफिया फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों और उनके परिवारों को लाभ पहुंचाना है।

विज्ञापन


इन मोबाइल सेंटरों के माध्यम से फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी जैसी सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विशेष शिक्षा, स्क्रीनिंग और आवश्यकता-आधारित मूल्यांकन भी किया जाएगा। बहु विषयक थेरेपी और पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। अभिभावकों को परामर्श और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। बच्चों की कार्यात्मक क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर फॉलोअप और रेफरल सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी। यह पहल शुरुआती चरण में मंडी, शिमला और कांगड़ा जिलों में शुरू की गई है।

शुरुआती चरण के बाद, इन मोबाइल रिसोर्स सेंटर की सेवाओं का विस्तार राज्य के सभी जिलों तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसका लक्ष्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सुलभ थेरेपी, पुनर्वास और विशेष सहायता सेवाएं उपलब्ध कराना है। थेरेपी ऑन व्हील्स पहल बच्चों की शीघ्र पहचान और स्क्रीनिंग में मदद करेगी। यह अभिभावकों की काउंसिलिंग और जागरूकता बढ़ाने का भी काम करेगी। शिक्षकों और विशेष शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विज्ञापन


इस पहल से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षणिक सहभागिता में सुधार होने की उम्मीद है। उनके संचार कौशल, कार्यात्मक क्षमताओं और आत्मनिर्भरता में भी वृद्धि होगी। सामाजिक सहभागिता में भी सुधार देखा जाएगा। इससे अभिभावक और शिक्षक घर तथा विद्यालय में बच्चों को लगातार सहयोग दे पाएंगे। इस अवसर पर समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें