जिला शिमला में इस साल मौसम की मार से सेब उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले जिला शिमला में इस बार सेब उत्पादन लगभग आधा रह गया है। जिले के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके साथ ही जिले में सेब उत्पादन को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर के आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी तक एपीएमसी के यार्ड और यार्ड के बाहर 51,03, 490 बॉक्स सेब मंडियों में पहुंचे हैं। इनमें 26,16,680 एपीएमसी के बाजार यार्ड में और 24,86,810 की खरीद यार्ड के बाहर पहुंचे हैं।
पिछले वर्ष 7 सितंबर तक 93,71,496 बॉक्स मंडियों में पहुंच चुके थे। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार 42,68,006 बॉक्स कम पहुंचे हैं। सेब की आपूर्ति में लगभग 45.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। एपीएमसी के अनुसार शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियां आती हैं। इनमें भट्ठाकुफर, रोहड़ू, नेरवा, खड़ापत्थर, पराला, मेहंदली, शिलारू, अन्नू और टापरी शामिल हैं।
एपीएमसी के अधिकारियों के अनुसार इस बार बीते वर्ष के मुकाबले सेब की आपूर्ति काफी कम है। अधिकारियों के अनुसार जिले में कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन अंतिम चरण पर पहुंच चुका है। कम और मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग खत्म होने के कगार पर है। जिले में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन अभी चल रहा है। वर्ष 2024-25 जिला शिमला में 1,40,62,300 पेटियों का उत्पादन हुआ था। विभाग के अनुसार सेब पर इस बार मौसम की बड़ी मार पड़ी है। मौसम के कारण उत्पादन कम हुआ है।
इसके चलते ही मंडियों में सेब की आवक काफी कम है। शिमला और किन्नौर सेब उत्पादन के दो प्रमुख जिले हैं। जिले में टाइडमैन, रॉयल, स्पर, गाला, रेड गोल्ड, गोल्डन समेत कई अन्य किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि फसल का उत्पादन कम होने के बाद भी बागवानों को सीजन में अभी तक अच्छे दाम मिल रहे हैं। संवाद
इस बार फल मंडियों में सेब की आपूर्ति काफी कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियों में सेब का कारोबार होता है। इस बार 7 सितंबर तक जिले में 51,03,490 बॉक्स मंडियों में पहुंचे हैं। -रविंद्र कुमार शर्मा, सचिव एपीएमसी शिमला-किन्नौर