हिमाचल प्रदेश में परिवहन व्यवस्था से जुड़े नियमों में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स, 1999 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत परिवहन वाहनों के परमिट से जुड़ी फीस और प्रक्रिया में बदलाव किया जाना प्रस्तावित है। सरकार ने इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे थे।
प्रस्तावित बदलाव का सीधा संबंध बसों समेत विभिन्न परिवहन वाहनों के परमिट से जुड़ी फीस से है। नए प्रावधान में वाहन की श्रेणी के हिसाब से अस्थायी और नियमित परमिट के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। उदाहरण के तौर पर राज्य के भीतर या ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों के लिए अस्थायी परमिट की फीस 750 रुपये और नियमित परमिट के लिए 1500 रुपये प्रस्तावित है। वहीं अन्य स्टेज कैरिज और प्राइवेट सर्विस वाहनों के लिए अस्थायी परमिट की फीस 500 रुपये और नियमित परमिट के लिए 1000 रुपये रखी गई है।
हर दो साल में बढ़ेगी फीस
प्रस्ताव में फीस को स्थायी तौर पर एक ही स्तर पर रखने के बजाय इसमें समय-समय पर संशोधन का प्रावधान भी रखा गया है। प्रस्तावित नियम के अनुसार शुल्क दरों में हर दो वर्ष बाद 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी और नई राशि को निकटतम दस के गुणक में राउंड ऑफ किया जाएगा।
इसके साथ ही परमिट के लिए आवेदन करने वालों को निर्धारित शुल्क का भुगतान कैश रसीद, ऑनलाइन भुगतान या ट्रेजरी चालान के माध्यम से करना होगा। परमिट या काउंटरसिग्नेचर के लिए फीस प्राप्त होने पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को अलग रसीद जारी करने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
बसों के टैक्स की गणना कैसे होती है?
हिमाचल में बसों पर लगने वाला स्पेशल रोड टैक्स भी कई मानकों के आधार पर तय होता है। परिवहन विभाग के अनुसार स्टेज कैरिज वाहनों के लिए एसआरटी की गणना में रूट पर आने वाली सड़क की श्रेणी, दूरी, बस का प्रकार और उसकी सीट क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। यानी बस का टैक्स केवल वाहन के आधार पर तय नहीं होता, बल्कि उसके संचालन वाले रूट और बस की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवहन विभाग ने वर्तमान एसआरटी व्यवस्था में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। साधारण, एक्सप्रेस/नाइट, सेमी-डीलक्स, डीलक्स और एसी बसों के लिए दरों में भी अंतर है।
परिवहन कारोबार पर पड़ेगा असर
नियमों में बदलाव का असर निजी बस ऑपरेटरों, स्टेज कैरिज संचालकों और अन्य परिवहन वाहन मालिकों पर पड़ सकता है। परमिट शुल्क में बदलाव के साथ भविष्य में फीस में निर्धारित अंतराल पर वृद्धि का प्रावधान होने से वाहन संचालकों को अपनी लागत का हिसाब पहले से रखना होगा। सरकार ने प्रस्तावित संशोधन पर प्रभावित लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार इन सुझावों पर विचार कर अंतिम नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी। उधर, हिमाचल परिवहन विभाग की वेबसाइट पर मोटर व्हीकल एक्ट, केंद्रीय मोटर व्हीकल रूल्स, हिमाचल मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट और हिमाचल मोटर व्हीकल रूल्स समेत संबंधित कानून एवं नियम उपलब्ध हैं।