इसकी डिमांड अब बढ़नी शुरू हो गई है। बर्फी का एक डिब्बा 325 रुपये में बेचा जा रहा है। ऑनलाइन सेब की बर्फी मंगवानी हो तो समूह ऑनलाइन भी डिलीवरी भिजवा देता है। समूह की ओर से सेब का जैम, सेब की चटनी, ड्राइड सेब, सेब का अचार, नाशपाती का जैम, चटनी, ड्राई पिअर, मूली का अचार, लिंगड़ का अचार और बुरांश का जूस भी तैयार किया जाता है। समूह की प्रधान आशु ठाकुर ने बताया कि सेब की बर्फी की मांग काफी बढ़ रही है। हर महीने करीब 25 हजार रुपये की बर्फी कुल्लू जिला में भेजी जाती है। इसके अलावा कामधेनु में भी भेजी जाती है। स्थानीय स्तर पर भी हम सेब की बर्फी बेच रहे हैं। सेब की बर्फी बनाने में काफी मेहनत लगती है। ऐसे में दाम भी उसी तरह तय किए गए हैं।
ऐसे तैयार होती है बर्फी
पहले चरण में सेब को तीन-चार बार साफ पानी से धोया जाता है। दूसरे चरण में सेब से पल्प निकाला जाता है। पल्प निकालने के बाद काफी देर तक पकाया जाता है। इसके बाद ड्राई फ्रूट मिलाए जाते हैं। फिर पल्प और ड्राई फ्रूट दोनों को पकाया जाता है। काफी देर तक पकाने के बाद जब रंग गहरा भूरा हो जाता है, तो इसे प्लेट में तीन से चार दिन तक रख दिया जाता है। फिर सेब की बर्फी बनकर तैयार हो जाती है। इसके तुरंत बाद छोटे-छोटे पीस में काटकर डिब्बे में पैकिंग की जाती है।
स्वयं सहायता समूहों को मूलभूत सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता
जिला र में स्वयं सहायता समूह बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता स्वयं सहायता समूहों को मूलभूत सुविधाएं, प्रशिक्षण मुहैया करवाना है। इसके अलावा समय-समय पर उनके लिए स्टॉल लगाने की सुविधा मुहैया करवाई जाती है। जिला में स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार किए जा रहे कई उत्पादों की मांग देश दुनिया में भी होने लगी है।....अनुपम कश्यप, उपायुक्त शिमला