साल 1971 में पाकिस्तान के दांत खट्टे वालों में से एक भारतीय सेना के शूरवीर और शौर्य चक्र विजेता रिटायर्ड कैप्टन डीएस ठाकुर एक बार फिर दुश्मनों से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ताजा हालात को देखते हुए 70 वर्षीय ठाकुर फिर से बॉर्डर पर सेवाएं देने को तैयार हैं। उन्होंने इसके लिए सेना से संपर्क भी साधा है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में कैप्टन ने बताया कि वे 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के भीतर तक घुस गए थे। उन्हें एक-एक लम्हा आज भी याद है। अब सेना बुलाती है तो पाकिस्तान में घुसने के लिए उन्हें न तो नक्शे की जरूरत है और न ही ट्रेनिंग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं है। हमेशा पीठ पर वार करता है। सेना को सर्जिकल स्ट्राइक बहुत पहले कर देना चाहिए थे। वर्ष 1971 के युद्ध का कोई भी जांबाज ऐसा नहीं होगा, जो पाकिस्तान को फिर से धूल चटाने का माद्दा न रखता हो।