शायद इसे ही सरकारी सिस्टम कहते हैं। जो है...चल रहा है...चलता रहेगा। बस कोई जुबान ना खोले। जुबान खोली तो खैर नहीं। इसी डर ने ढली स्थित मूक-बधिर स्कूल के 120 बच्चों का मुंह सिल दिया है, लेकिन कहते हैं जब कोई चीज हद से गुजर जाए तो फिर कोई चुप कैसे रहे। इन बच्चों के सब्र का बांध भी जवाब भी दे गया और टीम ने भी वहां जो देखा। उससे ऐसी सच्चाई सामने आई, जिसे देख और सुनकर हर किसी के रौंगटे खड़े हो जाएं। अमर उजाला ने स्कूल का दौरा किया। पेश है ये रिपोर्ट
शिमला के वाणी- श्रवण दोष और दृष्टिबाधित ढली स्कूल में मासूम बच्चों के भोजन में ही खेल हो रहा है। यहां तय मेन्यू के हिसाब से बच्चों को खाना नहीं दिया जा रहा है। सुबह के नाश्ते में सूखी खिचड़ी खाने को बच्चे मजबूर हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम बुधवार सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर हकीकत जानने के लिए स्कूल के मैस में पहुंची। यहां पर करीब 120 बच्चे पढ़ते हैं और यहीं रहते भी हैं।
मैस के बाहर लगे मेन्यू के मुताबिक बुधवार को अंडा, ब्रेड, मक्खन और दूध नाश्ते में दिया जाना था, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। बच्चों की थालियों में इसकी जगह खिचड़ी परोसी जा रही थी। पूछने पर बताया कि यह मूंग की खिचड़ी है लेकिन इस खिचड़ी में एक भी दाना मूंग का नजर नहीं आ रहा था। बता दें कि इस संस्थान में सिर्फ नेत्रहीन और न बोलने और जिसे सुनाई नहीं देता ऐसे बच्चे रहते हैं।
डाइनिंग हाल में करीब बीस बच्चे नाश्ता कर रहे थे और उनके सामने उनकी थालियों में नाश्ते के लिएएक एक कड़छी खिचड़ी परोसी गई थी और एक गिलास में दूध था। वहां कुक बच्चों को उनकी थालियों में एक एक कड़छी खिचड़ी की डाल रहा था और एक बच्चा दूसरे बच्चों को दूध दे रहा था लेकिन टीम को देखते ही कुक उनके गिलास में दूध देने लगा।
फटी रजाई में काट रहे पूरी रात
कुछ बच्चे सोकर उठ रहे थे। बिस्तरों की हालत बद् से बद्तर थी। किसी रजाई से रुईं निकल रही है तो किसी की चादर फटी हुई थी। बिस्तरों की हालत देख कर लग रहा था कि कई महीनों से बिस्तरों को धोया तक नहीं है, उनमें से बदबू ही बदबू आ रही थी। जब वहां बच्चों से बात की तो उन्होंने कहा कि हमें रात को सोने के लिए एक ही रजाई दी जाती है। पूरी रात ठंड लगती है। एक बच्चे ने कहा कि सोने से पहले हम डबल कपड़े पहन लेते हैं, ताकि रात को ठंड न लगे।
दूध के साथ मिलती हैं दो-तीन रोटियां
उसके बाद जब टीम नेत्रहीन बच्चों के कमरों में गई तो देखा कि कुछ बच्चे जमीन पर बैठ कर खिचड़ी खा रहे थे। जब उनसे बात की तो उन्होंने बताया की उन्हें रोजाना नाश्ते में दूध के साथ दो तीन रोटियां दी जाती हैं। दशहरे पर हमें खिचड़ी दे दी। जब उनसे पूछा गया कि कभी परांठा या ब्रेड और अंडा भी नाश्ते में खाते हैं तो एक बच्चे ने कहा कि परांठेे का तो आज तक भी स्वाद नहीं।
कोयलों के उठते धुएं से सेंक रहे हाथ
जैसे ही टीम संस्थान के कैंपस में पहुंची देखा की कोयलों से उठते धुएं के सामने बच्चे खड़े हैं और रात की आग के बच्चे हुए कोयलों से उठते धुएं के सामने हाथ रख कर अपने हाथों को गर्म कर रहे थे। जब बच्चों से पूछा गया कि तुम्हें आग सेंकने के लिए हीटर नहीं मिलता तो उन्होंने कहा कि हीटर तो तब भी नहीं मिलता जब बर्फ पड़ती है, एक बच्चे ने कहा कि यहां तक कि हमें बाहर ठंड से निजात पाने के लिए आग जलाने के लिए भी मना किया जाता है। कल रात को दशहरे पर यहां आग जलाई थी उसी की राख बची है।
ठंडे पानी से धोने पड़ते हैं कपड़े
बाथरूम में एक बच्चा ठंडे पानी के साथ अपने कपड़े धो रहा था। पूछने पर बताया कि कहा कि यहां गर्म पानी नहीं आता। जब टीम ने बाथरूम चैक किए तो किसी भी बाथरूम में एक भी नलके से पानी नहीं आ रहा था। सारे गीजर खराब पड़े हुए थे।
किसी का स्विच नहीं है तो किसी का प्लग ही नहीं हैं। संस्थान के सभी बच्चों के लिए सिर्फ एक सोलर सिस्टम लगा है जिस में पांच सौ लीटर की टंकी लगी है। उसी एक पानी की टंकी से सभी बच्चों को रोज नहाने के लिए पानी मिलता है। किसी की बारी आती है तो किसी की नहीं।
संस्थान से देते है निकालने की धमकी
जब बच्चों से पूछा कि सारी बातों की जानकारी किसी को क्यों नहीं देते तो इस पर बच्चों ने कहा कि संस्थान के कुछ अधिकारी हैं कि अगर तुमने संस्थान के बारे में किसी को बताया तो तुम्हें संस्थान से निकाल दिया जाएगा।
राशन की सप्लाई शुरू नहीं हुई- सुकेश
स्कूल के प्रधानाचार्य सुकेश ने बताया कि राशन का टेंडर पांच तारीख को हो गया है लेकिन अभी तक उसने सप्लाई शुरू नहीं की। जिस वजह से यह दिक्कत आ रही है और एक नवंबर से बच्चों के लिए उनके कमरों में हीटर लगा दिए जाएंगे।
एक साथ छुट्टियां पड़ने से आ रही दिक्कत: विकास
संस्थान के सेक्शन आफिसर विकास ने बताया कि एक साथ अधिक छुट्टियां पड़ने के कारण स्टाफ की दिक्कत आ रही है लेकिन संस्थान में हमेशा 24 घटें कुक तैनात रहता है, संस्थान में बच्चों के लिए बिस्तरों की भी कोई कमी नहीं है साथ ही उनके खाने पीने के लिए पूरा राशन मौजूद है।