फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुलासा! 4 साल में सरकारी स्कूलों में 10 लाख में से रह गए बस ये छात्र

Thu, 30 Mar 2017 09:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल के सरकारी स्कूलों में लगातार छात्रों की संख्या घट रही है। बीते चार सालों से लेकर अब तक सरकारी स्कूलों में 1,17,554 लाख छात्र कम हुए हैं। यह आंकड़ा साल दर साल घटता जा रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में न पढ़ाकर निजी स्कूलों को तरजीह दे रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2013-14 में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 10,07,196 थी। फरवरी, 2017 तक यह संख्या घटकर 8,89,642 रह गई है।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्ष 2014-15 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 9,59,147 थी, जबकि 2015-16 में यह संख्या घटकर 6,31,187 हो गई और अब 2016-17 फरवरी तक यह संख्या घटकर 8,89,642 रह गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में पहले से लेकर 12 वीं कक्षा तक जिला बिलासपुर में 850 स्कूल चल रहे हैं, जबकि चंबा में 1645, हमीरपुर में 757, कांगड़ा में 2540, किन्नौर में 264, कुल्लू में 1033, लाहौल-स्पीति में 170, मंडी में 2477, सिरमौर में 1452, सोलन में 1088 और ऊना जिले में 763 स्कूल खोले गए हैं। इसी तरह निजी संस्थानों की ओर से हिमाचल में 4359 स्कूल खोले गए हैं।
विज्ञापन


इसमें चंबा जिले में 213, बिलासपुर में 269, हमीरपुर में 359, कांगड़ा जिले में 1133, किन्नौर में 56, कुल्लू में 282, लाहौल स्पीति में 06, मंडी में 674, शिमला में 522, सोलन में 370 और ऊना में 253 स्कूल खोले गए।

एक को छोड़, बाकी निर्दलीय विधायक हमारे साथ: वीरभद्र

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि एक को छोड़कर बाकी सभी निर्दलीय विधायक कांग्रेस के साथ हैं। सीएम वीरभद्र सिंह ने चौपाल के एमएलए बलवीर सिंह वर्मा के अलावा अन्य निर्दलीय विधायकों के भाजपा से संपर्क में होने के कयासों को खारिज किया। वीरभद्र बोले - जहां तक मैं जानता हूं, अन्य निर्दलीय विधायक हमारे साथ हैं। 

निर्दलीय विधायक कांग्रेस के सदस्य नहीं हो सकते हैं, मगर वे उनके साथ हैं। बुधवार को सीएम वीरभद्र सिंह प्रदेश विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि रसूख की वजह से एपीएल के कुछ लोग बीपीएल में बने हुए हैं, उन्हें बाहर किया जा रहा है। सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों के घरों में बीपीएल के बोर्ड लगवाए जाएंगे, जो बीपीएल में हैं। सरकार की मंशा यह है कि बीपीएल सूची में वही परिवार शामिल हों, जो वास्तव में गरीब हों। 

एपीएल परिवारों की ओर से बीपीएल की तरह राशन कार्ड बनाकर लाभ लेने से जुडे़ एक सवाल पर सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि ऐसा अगर कहीं है तो यह जुर्म है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए उन्होंने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को चिट्ठी लिखी है। विकास कार्यों जैसे सड़कों, कॉलेजों और स्कूलों के लिए भूमि की जरूरत होती है। ऐसे में इस संबंध में पूरी प्रक्रिया को ढील देने की जरूरत है।

विकास में बाधा बन रही है एफसीए: वीरभद्र

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल के विकास कार्यों में फारेस्ट क्लीयरेंस बाधा बन रही है। एफसीए की समय पर मंजूरी न मिलने से सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों में देरी हो रही है। प्रदेश का वन महकमा एफसीए के मामलों को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद केंद्र को भेजता है, लेकिन देहरादून स्थित केंद्रीय विभाग इसमें आपत्ति लगा देता है। ऐसा लगता है कि कुछ मामलों में जानबूझ कर ये आपत्तियां लगाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि एफसीए मामलों का सरलीकरण करने के लिए केंद्रीय वन मंत्री को पत्र लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि आपत्तियों का जवाब 24 घंटे के अंदर प्राथमिकता के आधार पर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधायक आशा कुमारी के सवाल के जवाब में दी। मूल सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने गत तीन साल में सड़कों और पुलों के 226 मामले एफ सीए क्लीयरेंस के केंद्र को देहरादून कार्यालय को भेजे।

इसमें से 43 मामले स्वीकृत हुए हैं, जबकि 98 मामलों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति दी गई है। शेष 119 मामले लंबित पड़े हैं। विधायक आशा कुमारी ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 6 में से 5 मामलों की एफसीए क्लीयरेंस नहीं हुई है। सीएम ने कहा कि यह इत्तफाक हो सकता है। विधायक जयराम ठाकुर ने कहा कि फारेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने के कारण विकास में बहुत बाधा आई है। विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि सरकार से प्रदेश में एफसीए मामलों को निपटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने को कहा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने शिमला में एफसीए मामलों के लिए शिमला में एक नोडल अधिकारी बैठाया है, जो हर मामलों में बार-बार आपत्तियां लगाता रहता है। उन्होंने कहा कि जब जिला स्तर पर नोडल अधिकारी है तो फिर इसकी क्या आवश्यकता है। वन विभाग में अधिकारियों की एक बड़ी फौज है। इसलिए अधिकारियों को एडजस्ट करने के लिए शिमला में नोडल अधिकारी बैठाया गया है। 

ऊना और बद्दी में बनेंगे परिवहन नगर

परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि परिवहन विभाग की ओर से बद्दी और ऊना में नए परिवहन नगर स्थापित करना प्रस्तावित है। उन्होंने यह जानकारी भाजपा विधायक रिखी राम कौंडल की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि इन परिवहन नगरों की संरचना तैयार होने के बाद ही लागत का पता लग सकेगा।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को परिवहन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री जीएस बाली ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री को उन्होंने यह चेक विधानसभा स्थित उनके चैंबर में भेंट किया। मुख्यमंत्री ने परिवहन मंत्री तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री जीएस बाली की इस पुनीत कार्य के लिए सराहना की। 

उन्होंने कहा कि इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सहायता मिलेगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का भी आभार व्यक्त किया। इस मौके पर प्रधान सचिव खाद्य, नागरिक एवं आपूर्ति तरुण कपूर, खाद्य, नागरिक एवं आपूर्ति निगम की प्रबंध निदेशक सुधा देवी भी उपस्थित थीं।

बीवरेज कॉरपोरेशन में बिना पेमेंट शराब बेचने की होगी जांच

आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी - फोटो : File Photo
बद्दी स्थित प्रदेश बीवरेज कॉरपोरेशन डिपो में बगैर पेमेंट के शराब बेचने के मामले में जांच की जाएगी। यह जानकारी आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने बुधवार को विधानसभा के भीतर दी। नाहन से भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने ये मामला प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत उठाया। कटौती प्रस्ताव लाने से पहले डॉ. बिंदल ने कहा कि यह एक अत्यंत लोक महत्व का विषय है।

कहा कि प्रदेश में बीवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को बनाने के बाद एक गंभीर मामला सामने आया है। बद्दी में इस कॉरपोरेशन के डिपो में चार करोड़ की शराब बगैर भुगतान के ही कुछ ठेकेदारों को जाती रही है। ऐसे अन्य कई जगहों पर हो सकते हैं। इस बारे में राज्य सरकार क्या कर रही है? जवाब में आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ होगा तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

निगम के बेड़े में 3 हजार से ज्यादा बसें: बाली

परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि परिवहन निगम की बसों का बेड़ा 1700 से बढ़कर 3000 से पार हो गया है। जेएनएनयूआरएम के तहत 791 बसों को खरीदा गया है। बाली बुधवार को भाजपा विधायक राजीव बिंदल, बलदेव सिंह तोमर और कृष्ण लाल ठाकुर की तरफ से पूछे गए संयुक्त प्रश्न के उत्तर में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले 3 साल में केंद्र सरकार से जेएनएनयूआरएम योजना के तहत बसों की खरीद के लिए 163.68 करोड़ रुपये मिले हैं।

केंद्र की यूपीए सरकार ने वर्ष 2013 में 791 बसें मंजूर की थी। इसके अलावा इसमें 63 करोड़ वर्कशॉप का भी प्रोजेक्ट शामिल था। कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट 200 करोड़ रुपये का था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने 63 करोड़ वर्कशॉप का प्रोजेक्ट समाप्त कर दिया है। उन्होंने विपक्ष से इस प्रोजेक्ट को बहाल करने में सहयोग की अपील की।

भाजपा विधायक कृष्ण लाल ठाकुर और बलदेव सिंह तोमर ने अपने विधानसक्षा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त बसें चलाने की मांग की। बाली ने बताया कि 791 बसों में से रामपुर यूनिट को 34, रोहड़ू को 25, ग्रामीण को 20, लोकल को 47, तारादेवी को 15, सोलन को 17, नाहन को 20, मंडी को 50, कुल्लू को 38, सरकाघाट को 29, सुंदरनगर को 34, धर्मशाला को 38, चंबा को 50, पालमपुर

को 35, बैजनाथ को 27, पठानकोट को 43, हमीरपुर को 52, देहरा को 33, ऊना को 45, बिलासपुर और नालागढ़ को 37-37, परवाणू को 13, नगरोटा बगवां को 41 और करसोग डिपो को 11 बसें आवंटित की गई हैं। उन्होंने कहा कि निगम में चालकों की भर्तियां चल रही हैं परिचालकों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।




 

महेश्वर ने कसा तंज कहा- वन विभाग में मेडे अधिक भेड़े कम

भाजपा विधायक महेश्वर सिंह ने अपने प्रश्न में कहा कि वन विभाग में अफसरों की फौज खड़ी कर दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अच्छा गद्दी वह होता है जो भेड़े अधिक व मेडे कम पालता है। लेकिन वन विभाग में मेडे अधिक व भेड़े कम पाली गई है। रविंद्र सिंह रवि ने कहा कि प्रदेश में कई सड़कें बन चुकी है लेकिन एफसीए क्लीयरेंस अभी तक नहीं मिली है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पहले ही सांज्ञान ले लिया गया है। 

तेजी से चला है एनएच -22 का निर्माण कार्य: वीरभद्र 
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएच का काम दो कंपनियों को दिया गया है। यह काम बड़ी तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियां समय पर अपना टारगेट अचिव कर सकती हैं। कहा कि एनएच - 22 पर टिंबर ट्रेल से ढली तक गत दो सालों में 151 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2015 में 70, वर्ष 2016 में 66 तथा वर्ष 2017 में 28 फरवरी तक 15 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी कसौली के विधायक राजीव सैजल के सवाल के जवाब में दी।
विज्ञापन

हैंडपंप लगाने में भी हो रही राजनीति

विधानसभा में बुधवार दोपहर बाद सिंचाई, जलापूर्ति और सफाई को लेकर लाए गए कटौती प्रस्ताव पर भाजपा विधायकों ने सरकार पर जमकर आरोप लगाए। भाजपा विधायकों ने कहा हिमाचल में हैंडपंप लगाने में भी राजनीति की जा रही है। पेयजल और सिंचाई योजनाओं को आउट सोर्सिंग पर देने पर भी आपत्ति जताई। 13 भाजपा विधायकों के आरोपों पर वीरवार को सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स जवाब देंगी। 

कटौती प्रस्ताव में चर्चा के दौरान विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि आईपीएच विभाग की ओर से स्कीमों का काम आउटसोर्सिंग पर देने के कारण ठेकेदारों को मुनाफा पहुंचाया जा रहा है। परियोजना स्थापित करने में जितनी लागत आ रहीं है, उससे अधिक उनको चलाने के लिए खर्च किया जा रहा है। महकमा जनता को पानी देने में असमर्थ रहा है। भाजपा नेताओं की ओर से किए गए शिलान्यास की पट्टिकाओं को तोड़ा जा रहा है।

भाजपा विधायक डा. राजीव बिंदल ने सरकार पर हैंडपंप लगाने में राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के छुटभैया नेता अधिकारी के पास जाते हैं और टेबल पर मुक्का मारकर हैंडपंप लगवा लेते हैं। हैंडपंप लगाने के लिए विधायक प्राथमिकता को दरकिनार किया जा रहा है। लोगों को खड्ड का पानी बिना साफ किए पिलाया जा रहा है। विधायक विजय अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी विधायक निधि से एक हैंडपंप लगाने के लिए राशि दी थी, लेकिन विभाग ने उसे वापस कर दिया।

तर्क दिया कि ड्रिलिंग मशीन न होने से हैंडपंप नहीं लगाया जा सकता। विधायक इंद्र सिंह ने कहा कि आईपीएच विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में असफल रहा है। 25 प्रतिशत पेयजल वितरण के दौरान लीक हो जाता है। विभाग के पास पुरानी पाइपें बदलने के लिए नई पाइपें तक नहीं हैं। विधायक विक्रम सिंह ने कहा कि पानी का राजनीतिकरण कर दिया गया है। पेयजल वितरण में अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

विधायक महेश्वर सिंह ने आईपीएच में तैनात जलरक्षकों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें तकनीकी जानकारी नहीं है। उन्होंने साल दर साल पानी के दाम दस प्रतिशत बढ़ाए जाने पर भी सवाल खड़े किए। विधायक रिखी राम कौंडल ने कहा कि आउटसोर्स में दी गई स्कीमों को चलाने के लिए ठेकेदार गंभीर नहीं हैं। विधायक जयराम ठाकुर ने कहा कि विधायक प्राथमिकताओं की स्कीमों पर कोई काम नहीं हो रहा है।

हैंडपंप व्यक्ति विशेष का लाभ देने के लिए लगाए जा रहे हैं। विधायक हंसराज ने अपने विधानसभा क्षेत्र की पेयजल समस्या का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए अधूरी स्कीमों के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। विधायक गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सभी तरह के कार्यों में कांग्रेस कल्चर बढ़ गया है। इस कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

विधायक वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रशासनिक विफलता से पानी की समस्या विकराल रुप धारण कर चुकी है। विधायक केएल ठाकुर ने कहा कि समय पर डीपीआर तैयार नहीं होने से स्कीमों को शुरू करने में देरी हो रही है। उन्होंने आउटसोर्सिंग पर दी जाने वाली स्कीमों की अवधि को एक साल से बढ़ाकर 5 साल करने की मांग की। विधायक गोविंद राम शर्मा ने कहा कि पेयजल और सिंचाई योजनाओं को चलाने के लिए स्टाफ  की कमी विभाग की विफलता का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें