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'संसद में हू-हू कर चिल्लाते हैं विपक्षी सांसद, देखकर आती है शर्म'

Fri, 25 Nov 2016 08:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नोटबंदी मामले में लोकसभा में विपक्ष के हंगामे से भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार आहत हैं। उन्होंने कहा कि अब सदन और सड़क पर कोई फर्क नहीं रह गया है। सदन में सांसद ऐसे चिल्लाते हैं, जैसे गली-माहौलों में छोटे बच्चे।
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वीरवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, पूरा विपक्ष नारे लगाते हुए खड़ा हो गया। धीरे-धीरे अध्यक्ष के सामने घेरा डाल लिया। यह दृश्य अब आम होने लगा है। सड़क पर जिस प्रकार से नारेबाजी होती है, वही अब लोकसभा में होने लगी है।

नारे लगाते थक गए तो शोर मचाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सब देख कर शर्म आई। गली में खेलते हुए बच्चे जैसे हू-हू करके चिल्लाते हैं, ऐसा दृश्य विश्व के सबसे बडे़ लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रतिनिधि संस्था में हो रहा था। यह भारतीय लोकतंत्र के अवमूल्यन की चरम सीमा है।
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सर्वेक्षण में खुलासा, भारत में है सबसे ज्यादा भुखमरी

भारत के सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 60 करोड़ लोग केवल एक हजार रुपये मासिक पर गुजारा करते हैं। एक हजार रुपये मासिक में कोई भी जी नहीं सकता। वह सब घुट घुट कर मरते हैं। भुखमरी सबसे अधिक भारत में है। कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक भारत में है।

विश्व हंगर इंडेक्स में भारत बहुत नीचे है। कई बार भुखमरी की मजबूरी में माता पिता अपने बच्चों को बेचने पर विवश हो जाते हैं। लोकसभा में गरीबों को बचाने का नारा लगाने वाले लंबे समय तक सत्ता में रहे। ये आंकडे़ गवाह हैं कि उन्होंने गरीबों के लिए क्या किया। देश में विकास तो होता रहा पर सामाजिक न्याय नहीं हुआ। अमीरी चमकती रही और गरीबी सिसकती रही।
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मुट्ठी भर नेताओं को छोड़ बाकी के पास करोड़ों का काला धन

शांता ने कहा कि देश के कुछ नेताओं की पीड़ा वेदना और चिल्लाहट के पीछे एक बहुत बड़ी कड़वी सचाई है। कुछ मुट्ठी भर नेताओं को छोड़कर बाकी सभी के पास करोड़ों का काला धन था।

चुनाव लड़ने वालों के पास कई सौ करोड़ रुपये और चुनाव लड़ाने वालों के पास कई हजार करोड़ रुपये के नोट रखे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्णय से वह करोड़ों रुपये रद्दी हो गए।
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