शांता कुमार और किशन कपूर से बातचीत करते सीएम जयराम ठाकुर।
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पुख्ता सूत्रों की मानें तो शांता कुमार के चुनाव लड़ने से मना करने के बाद मुख्यमंत्री चाहते थे कि टिकट उनके मित्र दूलो राम को मिले। सीएम ने इसके लिए हाईकमान के समक्ष अंत तक जोर लगाया लेकिन अंतिम वक्त पर शांता कुमार ने दूलो राम को किनारे कर किशन कपूर पर दांव खेल दिया। बैजनाथ में महिला सम्मेलन के दौरान सभी कार्यकर्ताओं को कुछ देर के लिए खड़ा करवाकर सीएम ने शांता कुमार को सम्मान दिया।
अपरोक्ष रूप से कांगड़ा की चुनावी बागडोर शांता को थमा दी गई है। शांता कुमार ने लोकसभा चुनावी शंखनाद के लिए बैजनाथ को चुना जहां से उन्होंने बतौर अध्यापक अपने करियर की शुरुआत की थी। इस पूरे सियासी घटनाक्रम में शांता चुनावी विदाई के बावजूद सियासी रण में किंगमेकर की भूमिका में दिख रहे हैं।
शांता कुमार ने कहा कि वे आखिरी दम तक पार्टी की सेवा में लगे रहेंगे। उन्होंने लोक सभा चुनावों में किशन कपूर को भारी मतों से विजयी बनाकर दिल्ली भेजने का आह्वान कार्यकर्ताओं से किया।