इस दाैरान मुख्य वक्ता अंकिता, मुकेश और विक्की भारती ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा के व्यापारीकरण और परिसर में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल में बढ़ाई फीस से सामान्य और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो गया है। एसएफआई ने कहा कि फीस वृद्धि किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
186 नियुक्तियों की जांच के लिए न्यायिक समिति की मांग
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में नियमों का पालन किए बिना की गई 186 प्रोफेसरों की नियुक्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इन नियुक्तियों की जांच के लिए तत्काल उच्चस्तरीय न्यायिक समिति गठित करने की मांग की।एसएफआई नेताओं ने कहा कि समिति के माध्यम से इन नियुक्तियों की वास्तविकता सामने लाई जानी चाहिए। यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के साथ इसमें संलिप्त अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
कुलपति से बातचीत की मांग, चार बजे तक डटे रहे छात्र
एसएफआई ने कुलपति आचार्य महावीर सिंह से मौके पर आकर छात्रों से बातचीत करने की मांग की। प्रदर्शनकारी दोपहर बाद तक वीसी कार्यालय के बाहर डटे रहे और शाम चार बजे तक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। चार बजे के बाद छात्रों को जानकारी मिली कि कुलपति उनसे बातचीत के लिए नहीं आएंगे। इसके बाद एसएफआई ने प्रदर्शन समाप्त करने के बजाय आंदोलन आगे जारी रखने का ऐलान किया। छात्रों ने कहा कि कुलपति के नहीं मिलने से उनका विरोध खत्म नहीं हुआ है। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि फीस वृद्धि वापस लेने और छात्रों की अन्य मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।