शहर समेत जिले के कॉलेजों में प्रदर्शन कर सरकार को चेताया, चुनाव बहाल न हुए तो उग्र होगा आंदोलन
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चुनाव न होने से दब रहे छात्रों के मुद्दे : पवन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर एसएफआई की जिला कमेटी के आह्वान पर राजधानी के साथ जिले के कॉलेजों में धरना-प्रदर्शन किया गया।
संजौली, राजीव गांधी महाविद्यालय, राजकीय कन्या महाविद्यालय, चायल कोटी, सावड़ा, करसोग, रामपुर और ठियोग कॉलेज परिसरों में कार्यकर्ताओं ने बुधवार को प्रदर्शन कर चुनाव बहाल करने की मांग उठाई। एसएफआई के जिला सचिव पवन कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 2013 के बाद प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव पर विश्वविद्यालय और कॉलेजों में प्रतिबंध लगाकर आम छात्रों से अपने प्रतिनिधि को चुनने के अधिकार से वंचित रखने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी प्रगतिशील सोच रखने वाला वर्ग होता है, वह सामाजिक और आर्थिक तथा राजनीतिक समझ रखता है। प्रदेश सरकार के चुनाव पर प्रतिबंध लगाए जाने से विद्यार्थियों को राजनीतिक, वैचारिक और सामाजिक रूप से निष्क्रिय करने का कार्य किया है। एससीए चुनाव से छात्रों में राजनीतिक और विचारों की क्रांतिकारी चेतना पैदा होती है। वह अपने हक के लिए लड़ना सीखता है। सरकारों से शिक्षा के निजीकरण, बाजारीकरण और भगवाकरण के हो रहे प्रयासों के खिलाफ लड़ाई लड़ना सीखता है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एससीए का अपना इतिहास रहा है।
एसएफआई ने हमेशा शिक्षा और छात्र हितों की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की सरकारें एससीए को अपने लिए खतरा मानती हैं। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने चुनाव को बहाल करने की हिम्मत नहीं जुटाई। जिला अध्यक्ष विवेक नेहरा ने कहा कि एससीए चुनाव बहाल करवाने के लिए एसएफआई एक निर्णायक लड़ाई लड़ने जा रही है। बारह साल पहले प्रतिबंधित किए गए छात्र संघ चुनाव के परिणाम आज सामने आने लगे हैं। शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में कमी आई है। लिंगदोह कमेटी 2006 की सिफारिशों में भी छात्रों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने ओर उन्हें जिम्मेदार बनाना जरूरी है। उन्हाेंने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव की जगह मनोनयन से एससीए गठन एक औपचारिकता रह जाती है। इससे मनोनीत एससीए सिर्फ प्रशासन के हाथ में कठपुतली की तरह कार्य करती है। इसलिए छात्र संघ चुनाव को बहाल करने पर सरकार जल्द फैसला लें। यदि ऐसा न किया तो एसएफआई चुनाव बहाल करवाने के लिए आंदोलन पर उतरेगी।