छात्रों का निलंबन वापस लेने की मांग, कॉलेज पर एकतरफा कार्रवाई करने का लगाया आरोप
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छात्रों को तुरंत कक्षाएं लगाने की अनुमति देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के राजीव गांधी महाविद्यालय हिंसा मामले में निलंबित छात्रों की बहाली की मांग को लेकर एसएफआई ने सोमवार को कॉलेज में प्रदर्शन किया।
एसएफआई के राज्य सचिव अमित ठाकुर सहित अन्य संगठन नेताओं ने निलंबन को अवैध और एकतरफा कार्रवाई करार दिया। एसएफआई नेताओं ने निलंबन तुरंत वापस लेने और छात्रों को परिसर तथा कक्षाओं में जाने की अनुमति देने की मांग के समर्थन में घंटों नारेबाजी की। एसएफआई की जिला कमेटी ने चेताया कि यदि निलंबन को वापस नहीं लिया तो एसएफआई आने वाले समय में आंदोलन को और तेज करेगी। इसके लिए कॉलेज प्रशासन जिम्मेदार होगा। छात्र संगठन के राज्य सचिव अमित ठाकुर और अन्य नेताओं ने कॉलेज प्राचार्य तथा अनुशासन समिति के सदस्यों से मुलाकात कर इस मांग को उठाया। एसएफआई के जिला अध्यक्ष अखिल और सचिव कमल शर्मा ने कहा कि एक माह से शहर के कॉलेजों के साथ विवि का माहौल खराब करने तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़े जा रहे आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन और सरकार, छात्र राजनीति को खत्म करने का प्रयास कर रही है।
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कॉलेज प्रशासन एक विचारधारा विशेष के छात्रों के निलंबन को लेकर किए जा रहे सवालों का जवाब देने में नाकाम रहा है। हिंसा का बहाना बनाकर परिसर में प्रदर्शन बंद किए जा रहे हैं। कमल ने कहा कि प्रदेश सरकार छात्र संघ चुनाव पर 2014 से प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा कि एसएफआई कार्यकर्ताओं पर तेजधार हथियारों से हमला होता है जिसमें एनएसयूआई के कार्यकर्ता शामिल थे। लेकिन कॉलेज प्रशासन एसएफआई कार्यकर्ताओं को निलंबन करता है। यह पक्षपात पूर्ण रवैया मंजूर नहीं होगा।
कोटशेरा कॉलेज के 11 छात्र निलंबित
कोटशेरा कॉलेज में 7 नवंबर को छात्र गुटों के बीच हुई हिंसा मामले में कॉलेज की अनुशासन एवं सलाहकार समिति की अनुशंसा पर एसएफआई के 9 और एबीवीपी के 2 कार्यकर्ताओं को आठ नवंबर को निलंबित कर दिया था। एनएसयूआई के चार कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निलंबित किए छात्रों को 21 नवंबर तक अभिभावकों के साथ कमेटी और प्राचार्य के समक्ष पेश होने के आदेश दिए थे।