फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: एचपीयू के कई विभागों ने नहीं सौंपी ऑडिट-फाइनेंस रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
विवि प्रशासन से दिए रिपोर्ट जमा करने के निर्देश, वर्ष 2022 से लंबित हैं रिपोर्टें
विज्ञापन

विभागों को दो माह के भीतर जमा करना होगा विवरण

एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला के कई विभागों ने वर्ष 2022 से अब तक अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय विवरण विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं सौंपा है। इससे करोड़ों रुपये के विभागीय खर्च, अनुदान, शोध परियोजनाओं और अन्य वित्तीय लेन-देन का समेकित लेखा-जोखा अधूरा पड़ा है।

मामले को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों और संस्थानों को दो महीने के भीतर लंबित ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय विवरण जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। विभागों से प्रत्येक वित्तीय वर्ष के आय-व्यय, अनुदान उपयोग, परियोजनाओं पर हुए खर्च और ऑडिट संबंधी अभिलेख समय पर जमा होने चाहिए। इन दस्तावेजों के आधार पर विश्वविद्यालय का समेकित वित्तीय लेखा तैयार किया जाता है। चार वर्ष से रिकॉर्ड लंबित रहने के कारण कई विभागों का वित्तीय मिलान पूरा नहीं हो सका है। मामला ऐसे समय सामने आया है जब विश्वविद्यालय वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर पहले भी सवालों में रहा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में भी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में संस्थागत कमियों, शैक्षणिक खामियों और वित्तीय निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय के अनुसार एचपीयू में तीन स्तरीय वित्तीय ऑडिट व्यवस्था लागू है। पहले आंतरिक ऑडिट, फिर चार्टर्ड अकाउंटेंट से बाहरी ऑडिट और अंत में महालेखाकार कार्यालय की अंतिम जांच के बाद वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। ऐसे में विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड लंबित रहने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है।
विज्ञापन



विभाग जल्द जमा करें रिपोर्ट
कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि सभी विभाग निर्धारित समय सीमा में ऑडिट रिपोर्ट, आय-व्यय विवरण और अन्य वित्तीय अभिलेख उपलब्ध करवाएं। समय पर रिपोर्ट जमा नहीं होने पर विश्वविद्यालय के वार्षिक वित्तीय जांच, वैधानिक अनुपालना और भविष्य की ऑडिट प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। तय अवधि पूरी होने के बाद लंबित विभागों की अलग से समीक्षा की जाएगी और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पर भी विचार होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें