देश समेत प्रदेश के उद्योगों में हवा के सही आवागमन को सुचारु रूप से लागू करने के लिए सात बदलाव करने से आंतरिक वातावरण में सुधार हुआ है। इसका खुलासा जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एके सिंह की रिपोर्ट में हुआ है। शोध में पाया गया कि यदि उद्योगों में मुख्यत: सात जरूरी बदलाव कर दें तो कामगारों को फेफड़ों, दमा, एलर्जी, सीओपीडी, क्षय रोग और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है। इस रिपोर्ट को उन्होंने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र नई दिल्ली में भी पेश किया है। रिपोर्ट को सराहा गया है। शोध की रिपोर्ट को अब सरकार को भी भेजा जाएगा ताकि उद्योगों में बदलाव के लिए नियमों को तैयार किया जा सके। शोध के दौरान प्रदेश में 10 उद्योगों में हवा की शुद्धता की जांच की गई।
इसके बाद उद्योगों में कुछ हवा को शुद्ध करने के सात बदलाव किए गए। इससे हवा के सकारात्मक गुणवत्ता वाले परिणाम सामने आए, बल्कि कामगारों के फेफड़ों के स्वास्थ्य (लंग्स हेल्थ इंडेक्स) में बेहतरी पाई गई। इसके आधार पर डाटा तैयार किया गया। शोध के दौरान पाया गया कि उद्योगों के अंदर हवा की गुणवत्ता काफी खराब थी। हवा के क्रॉस होने की भी जगह नहीं थी। वहीं कई जगह कूड़ा-कचरा भी उद्योगों के आसपास जलाया जा रहा था। वहीं कई जगह उद्योगों के भीतर प्रयोग में लाने वाली मशीनरी में भी धुआं और धूल-मिट्टी (पाटिकूलेट मेटर 2.5 एवं 10) उत्पन्न होता था। शोध में यह भी पाया गया कि अगर इसी वातावरण में आगामी कुछ वर्षों में कामगार कार्य करते रहते तो फेफड़ों की बीमारियां होने की आशंका थी। अब दो साल बाद कामगार 10 उद्योगों में स्वच्छ हवा में कार्य कर रहे हैं।