उन्होंने 2002 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर समय रहते कोई कानूनी चुनौती नहीं दी। इसलिए वे सतीश कुमार एवं अन्य मामलों में दिए गए लाभों के हकदार नहीं हैं। वर्ष 2002 और 2012 की चयन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को अदालत के निर्देशों के अनुसार लाभ दिए गए थे। हालांकि, 2006-07 के शिक्षक वर्ष 2005 के अलग विज्ञापन से चयनित हुए थे। यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के अनुपालन में की गई है। विशेष रूप से एलपीए संख्या 836/2025 (कौशल चंद्र बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 25 फरवरी 2026 को निर्णय दिया गया था। अदालत ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने 2002 की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी, वे लाभ के हकदार नहीं हैं। 2005 के अलग विज्ञापन से चयनित 2006-07 के शिक्षक इन लाभों से वंचित रहेंगे। यह फैसला शिक्षकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
निदेशालय ने 11 मार्च 2025 को जारी अंतिम वरिष्ठता सूची में संशोधन किया है। इन शिक्षकों को दिए गए वरिष्ठता क्रमांक तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए गए हैं। अब उनकी वरिष्ठता 20 जून 2017 और 10 मार्च 2022 को जारी विभागीय अंतिम वरिष्ठता सूचियों के अनुसार निर्धारित होगी। यह बदलाव हजारों शिक्षकों के सेवा संबंधी दावों पर सीधा असर डालेगा। इस संशोधन से कई शिक्षकों की पदोन्नति की उम्मीदें भी प्रभावित होंगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से कई शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। जिन शिक्षकों को पिछले वर्षों में संशोधित वरिष्ठता के आधार पर लाभ मिलने की उम्मीद थी, उन्हें अब निराशा हाथ लगेगी। यह निर्णय उनकी सेवा शर्तों और भविष्य की संभावनाओं पर असर डालेगा।