सामरिक महत्व की भानुपल्ली-बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेललाइन से अलग सेना के लिए लेह में चीन सीमा तक करीब 13 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाएगा। यह ट्रैक लेह के शेशरथांग के करीब नदी के किनारों से होकर बिछाया जाएगा। इस ट्रैक के बनने से सेना को सड़क मार्ग से सामान नहीं ले जाना पड़ेगा। रसद पहुंचाने में आसानी होगी। मुख्य ट्रैक पर भी शेशरथांग समेत पांच स्टेशन ऐसे होंगे, जहां सेना को सामान उतारने-चढ़ाने की विशेष सुविधा दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि जून 2020 में प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद डीपीआर तैयार करने के लिए उत्तर रेलवे ने तेजी दिखाई है। डीपीआर मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय इस पर मंथन करेगा। इस परियोजना को साल 2022-23 के आम बजट में शामिल किया जा सकता है। सामरिक, व्यापारिक और पर्यटन की दृष्टि से रक्षा मंत्रालय की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना भानुपल्ली-मनाली-लेह रेललाइन की कुल लंबाई करीब 476 किलोमीटर है।
सिस्सू
डेबरिंग
लेह टर्मिनस
शेशरथांग
खारू
सामरिक महत्व की भानुपल्ली-मनाली-लेह रेललाइन की डीपीआर के अनुसार पुलों, टनलों, सिविल कार्य, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और टेली कम्यूनिकेशन, भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों पर करीब 99,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हिमाचल और लद्दाख में 1100-1100 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 26 फीसदी वन भूमि भी शामिल है। भूमि अधिग्रहण पर 11.5 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस रेललाइन में चार खंड होंगे। पहला खंड बैरी से मंडी, दूसरा मंडी से मनाली, तीसरा मनाली से उपशी और चौथा उपशी से लेह तक का होगा। रेललाइन के लिए 62 हजार करोड़ की लागत से पुलों और टनलों का निर्माण होगा।
उत्तर रेलवे ने बरमाणा-मनाली-लेह रेललाइन की डीपीआर भी तैयार कर दी है। 31 दिसंबर से पहले रेलवे बोर्ड को फाइनल डीपीआर सौंप दी जाएगी। इस सामरिक रेललाइन के लिए करीब 150 किलोमीटर विभिन्न अप्रोच रोड बनेंगी।