सभी विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है कि ऐसे कितने कर्मचारी हैं, जिन्हें वित्तीय लाभ मिलने जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों को वरिष्ठता लाभ देने के लिए अनुबंध सेवाओं को आंकने के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के एक फैसले के खिलाफ सरकार पहले हाईकोर्ट गई, वहां केस हार गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के खिलाफ गई और वहां भी हार गई।
क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने सही माना था कि अनुबंध आधार पर दी सेवाओं को नियमितीकरण के बाद वरिष्ठता और अन्य लाभों के उद्देश्य से गिना जाना चाहिए। अब राज्य सरकार पर वरिष्ठता को नए सिरे से तय करने की कानूनी मजबूरी है। पहले मामला राज्य खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से संबंधित था। अब सारे विभागों पर लागू करने की बाध्यता होगी।
अनुबंध सेवाओं को नियमितीकरण और अन्य लाभों के लिए आंके जाने पर हजारों कर्मचारियों की पदोन्नतियों पर तलवार लटक गई है, जो समय-समय पर होती रही हैं। इससे उन्हें दिए गए वित्तीय लाभों की भी रिकवरी की जा सकती है।