साल 2013 में विजिलेंस ने धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरी देने के नाम पर कथित भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू की थी। लंबे समय तक जांच ठंडे बस्ते में रही। ब्यूरो ने पिछले साल क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की तो कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद नए सिरे से मामले की जांच शुरू हुई।
प्रदेश सरकार ने मित्रा को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ जांच के लिए विजिलेंस को मंजूरी दे दी। मामले में मित्रा व कई पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों व नामजद आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन फोन रिकॉर्डिंग की आवाज को मित्रा की आवाज से मिलाने के मामले में मित्रा ने सैंपल देने से इंकार कर दिया।
इसके बाद विजिलेंस ने सीजेएम कोर्ट में आवेदन किया कि भंडारी मामले में केस प्रॉपर्टी रहे रिकॉर्डिंग को इस केस में स्थानांतरित कर दिया जाए। कोर्ट ने ब्यूरो के इस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अब ब्यूरो इन रिकार्डिंगों को बतौर साक्ष्य मित्रा मामले में इस्तेमाल कर रहा है।