दरअसल, जिस समय का यह मामला है, उस समय भाजपा की ही सरकार थी और मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल थे। चूंकि धारा 118 का हर मामला सरकार के पास अनुमति के लिए भेजा जाता है। ऐसे में मित्रा की दलील ब्यूरो और वर्तमान सरकार की मुश्किल बढ़ा रही है।
सूत्रों की मानें तो अब इस जांच को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर जांच आगे बढ़ी तो ब्यूरो को तत्कालीन सरकार के उन सभी भाजपा नेताओं को भी पूछताछ के लिए बुलाना पड़ेगा जिनके खिलाफ मित्रा व दोनों आरोपी व्यापारी आरोप लगा रहे हैं।