बचपन से संगीत और कला के माहौल में पले बढ़े सोमदेव कश्यप ने मंडी शहर के युवाओं को एकजुट कर आर्केस्ट्रा ग्रुप का गठन किया। इसके पश्चात वर्ष 1973 में सोम देव कश्यप पहाड़ से मायानगरी मुंबई में किस्मत आजमाने निकल पड़े। जहां इन्होंने सहायक संगीत निर्देशक के रूप में कार्य शुरू किया।
हिमाचल के लोक संगीत और लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन करने वाले मशहूर संगीतकार एसडी कश्यप को हिमाचल भाषा कला संस्कृति अकादमी की ओर से निष्पादन कला सम्मान -2018 से नवाजा गया है। उनके इस सम्मान को लेकर मंडी शहर के संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं में खुशी की लहर है। मंडी शहर के भगवाहन मुहल्ला में जन्में सोम देव कश्यप एसडी कश्यप के नाम से मशहूर हैं। बचपन से संगीत और कला के माहौल में पले बढ़े सोमदेव कश्यप ने मंडी शहर के युवाओं को एकजुट कर आर्केस्ट्रा ग्रुप का गठन किया। इसके बाद वर्ष 1973 में सोम देव कश्यप पहाड़ से मायानगरी मुंबई में किस्मत आजमाने निकल पड़े। जहां इन्होंने सहायक संगीत निर्देशक के रूप में कार्य शुरू किया। मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन से प्रभावित सोमदेव कश्यप ने मुंबई में अपना नाम एसडी कश्यप रखा और मार्शल आर्ट पर आधारित हिंदी फिल्म कोबरा और अनोखा मोड़ फिल्मों के लिए संगीत दिया।
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मुंबई प्रवास के दौरान सोमदेव कश्यप ने सुविख्यात पार्श्व गायिका आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, सुषमा श्रेष्ठ, सविता साथी, गायकों सुरेश वाडेकर, मोहम्मद अजीज, विनोद राठौर, अनवर, गौरी शंकर और दीपक आदि से अपने संगीत निर्देशन में आवाज दिलवाई। एसडी कश्यप ऐसे संगीतकार हैं जिन्होंने हिमाचल संगीत की लोक लहरियों को मुंबई तक पहुंचाया। मगर माया नगरी उन्हें रास नहीं आई और वे वापस अपने शहर मंडी लौट आए। वर्ष 1986 में बल्हघाटी के सकरोहा गांव में उन्होंने साउंड एन साउंड नाम से हिमाचल का पहला रिकार्डिंग स्टूडियो स्थापित किया और हिमाचली संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।