हिमाचल में कोरोना के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, दूसरी ओर स्थानीय प्रवेशद्वार पर रात को स्वास्थ्य स्टाफ के तंबू खाली होने से बाहर से आने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग तक नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि रात को बाहरी राज्यों से मैहतपुर पहुंच रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ये लोग निजी वाहनों में रात भर बैठने को मजबूर हैं।
कई लोगों की रातें सड़क पर ही कट रही हैं। प्रवेशद्वार पर तैनात पुलिस कर्मियों की मानें तो दो-तीन दिन से स्वास्थ्य स्टाफ के रात्रि शिफ्ट में ड्यूटी पर न आने से वे बाहर से आने वाले लोगों को बिना मेडिकल जांच आगे नहीं भेज सकते। शनिवार रात्रि को करीब 2 बजे मैहतपुर प्रवेशद्वार पर अपने बेटे के साथ दिल्ली से नकड़ोह आ रहे सेना के जवान गुलाम मुहम्मद के मुताबिक अधिकृत पास होने के बावजूद उन्हें रविवार सुबह तक इसलिए दाखिल नहीं हो दिया गया, क्योंकि मेडिकल स्टाफ नहीं है।
स्वास्थ्य कर्मी जब तक थर्मल स्क्रीनिंग नहीं कर लेते, तब तक आगे नहीं जाने की इजाजत नहीं है। दिल्ली से आए एक अन्य परिवार ने भी शनिवार की रात अपनी गाड़ी में गुजारी। कई अन्य लोग भी सुबह होने और स्वास्थ्य स्टाफ के आने का इंतजार करते देखे गए। सेना की वर्दी में छुट्टी लेकर घर जा रहे गुलाम मुहम्मद ने कहा कि स्वास्थ्य महकमे के इंतजामों को देखकर धक्का लगा। बड़ा सवाल यह कि रात्रि के वक्त अपने राज्य लौटने वाले उन लोगों का आखिर कसूर हैं, जिन्हें थर्मल स्क्रीनिंग के लिए रातें सड़क पर गुजारनी पड़ रही हैं।
स्टाफ की कमी के कारण शाम आठ बजे तक बैठ रहा स्टाफ: सीएमओ
सीएमओ डॉ. रमन कुमार शर्मा ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण मैहतपुर बैरियर सहित अन्य बॉर्डर एरिया में सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक ही स्टाफ बैठता है। उन्होंने कहा कि रेड जोन वालों की संस्थागत क्वारंटीन सेंटर और अन्य लोगों की मेडिकल जांच होम क्वारंटीन के दौरान ही की जा रही है।