बिलासपुर जिले के स्वारघाट बॉर्डर पर जिला अस्पताल के एनेस्थीसिया के चिकित्सक नाके पर ड्यूटी दे रहे हैं। हालात यह है कि स्वास्थ्य कर्मी हर दिन 120 किलोमीटर अपनी निजी गाड़ी में सफर कर ड्यूटी पर पहुंच रहे हैं। वहां न उनके रहने की व्यवस्था है और न खाने-पीने की बेहतर सुविधा है। ऐसे में कोरोना योद्धाओं के प्रति फूल और ताली-थाली का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
जिले में कई एमबीबीएस और एएमओ को छोड़कर जिला अस्पताल का स्टाफ स्वारघाट में नाका ड्यूटी दे रहा है, जबकि नाका पर सिर्फ टेंपरेचर स्क्रीनिंग और डाटा लिखने का ही काम है। इसे मार्कंडेय ब्लॉक के हेल्थ वर्कर भी पूरा कर सकते हैं। इतना ही नहीं, जिला अस्पताल में आए दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
वहां से विशेषज्ञों और लैब टेक्नीशियन को नाका ड्यूटी पर लगाया गया है, जबकि एनेस्थीसिया और ईएनटी चिकित्सकों का वहां कोई काम नहीं है। बॉर्डर पर पिछले डेढ़ माह से एनेस्थीसिया और ईएनटी के चिकित्सक ड्यूटी पर भेजे जा रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर कई सवाल उठते हैं।
जिला अस्पताल के कर्मचारियों को नाका ड्यूटी पर भेजने का कोई औचित्य नहीं है। अगर फिर भी उन्हें भेजा जा रहा है तो उन्हें आवाजाही के लिए स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी मिलनी चाहिए। उन्हें मौके पर हर सुविधा का भी प्रावधान होना चाहिए। मैं खुद इस बात की जांच कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उचित दिशा-निर्देश जारी करूंगा।
- आरडी धीमान, अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव हिमाचल प्रदेश