हिमाचल में 30 अगस्त तक स्कूल बंद।
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हिमाचल प्रदेश में स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए 30 अगस्त तक बंद कर दिया गया है। कोरोना महामारी की समीक्षा के बाद शुक्रवार को सरकार ने इस बाबत निर्देश जारी किए। शिक्षकों और गैर शिक्षकों को पहले की ही तरह नियमित तौर पर स्कूलों में आना होगा। सरकार ने आवासीय स्कूलों को खुले रखने का फैसला लिया है। इन स्कूलों में कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए बनाए गए एसओपी का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले आवासीय स्कूलों के प्रभारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने बीते दिनों कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर 22 अगस्त तक स्कूल विद्यार्थियों के लिए बंद रखने का फैसला लिया था। शुक्रवार को सरकारी अवकाश के दौरान मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्कूलों को खोलने को लेकर की गई समीक्षा बैठक के बाद दोबारा से स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है। राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से इस बाबत लिखित निर्देश जारी किए गए हैं। आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुले रखने के लिए तर्क दिया गया है कि अगर इन विद्यार्थियों को घरों में भेजा गया तो कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में इन स्कूलों को बंद नहीं किया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवासीय स्कूलों का लगातार औचक निरीक्षण करने का जिम्मा दिया गया है।
हिमाचल मे प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी जरूरी
बता दें, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने हिमाचल में प्रवेश के लिए कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र या निगेटिव रिपोर्ट के अलावा ऑनलाइन पंजीकरण करवाने की शर्त लगाई है।
प्रदेश में होने वाली सभी तरह की अंतरराज्यीय आवाजाही की निगरानी सरकार के कोविड ई-पास पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से की जा रही है। हालांकि मालवाहनों की आवाजाही पर शर्त लागू नहीं होगी।
हर रोज या वीकेंड पर आवाजाही करने वालों जैसे उद्योगपतियों, व्यापारी, आपूर्तिकर्ता, उद्योगों के कामगार, परियोजना प्रस्तावकों, सेवा प्रदाताओं, सरकारी कर्मचारियों, मरीजों आदि के लिए कोविड वैक्सीन की दोनों डोज के प्रमाणपत्र या आरटीपीसीआर/रैट निगेटिव रिपोर्ट की शर्त में छूट दी गई है। बशर्ते उन्हें 72 घंटों के भीतर लौटना होगा। राज्य से बाहर गए हैं तो भी 72 घंटों के भीतर लौटना होगा। वहीं अभिभावकों के साथ आने वाले 18 से कम आयु के बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन की दोनों डोज के प्रमाणपत्र या आरटीपीसीआर/रैट निगेटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं है। वहीं, प्रदेश और बाहरी राज्यों के लिए चलने वाली बसें भी अब 50 फीसदी सीटिंग क्षमता के साथ दौड़ रही हैं।