हिमाचल में स्कूलों को शुरू हुए करीब दो महीने हो गए हैं लेकिन कक्षा एक से 10वीं तक के बच्चों को पाठ्य पुस्तकें आज तक नहीं मिल पाई हैं।
‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ का नारा देने वाले शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा बोर्ड के बीच तालमेल की कमी और लापरवाही के कारण सरकारी स्कूल के बच्चों को मुफ्त मुहैया करवाई जाने वाली ये किताबें कई जिलों के डिपो में डंप हैं।
नतीजन स्कूलों में बिना किताबों के बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। कमोबेश यह स्थिति पूरे प्रदेश में है। प्रदेश में शीतकालीन सत्र के स्कूल 11 फरवरी से शुरू हो चुके हैं। कायदे से नया सत्र शुरू होने के पहले ही किताबें छप जानी चाहिए थीं।
लेकिन स्कूली किताबें देर से छपी। कुछ कक्षाओं और विषयों की किताबें तो अभी तक नहीं छप सकी हैं। खैर जो किताबें छपी भी वो जिलों में स्थित बोर्ड के डिपों में पड़ी धूल फांक रही हैं।