यह भी खुलासा हुआ है कि साल 2013-14 से 2016-17 के दौरान कई संस्थानों में जहां प्रति वर्ष 300 से 500 विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर रहे थे वहीं किसी एक साल के दौरान इनकी संख्या शून्य भी दिखा दी गई। इस तरह की लापरवाही को लेकर भी उच्च शिक्षा निदेशालय के अफसरों की नींद नहीं टूटी। निदेशालय के किसी भी अफसर ने संस्थानों में जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
जांच के दौरान दो ऐसे संस्थान भी मिले हैं, जिन्होंने एक ही बैंक अकाउंट में कई विद्यार्थियों की छात्रवृत्तियां प्राप्त की। सीबीआई ने जब छात्रों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि हम तो ऐसे किसी भी संस्थान में पढ़ाई नहीं करते हैं। दाखिला लेने के लिए इन संस्थानों में आवेदन जरूर किया था लेकिन कहीं और दाखिला मिलने पर पूर्व में आवेदन करने वाले संस्थानों से दस्तावेज वापस नहीं लिए।