एडमिशन देने के समय कई संस्थानों ने मेरिट अधिक बता कर प्रवेश नहीं दिया। इस दौरान विद्यार्थी भी अन्य संस्थानों में चले गए। कई विद्यार्थियों ने पहले जिन संस्थानों में आवेदन किए थे। उनसे अपने दस्तावेज वापिस नहीं लिए।
जिसका लाभ उठाते हुए कई संस्थानों ने फर्जी एडमिशन दिखाकर छात्रवृत्ति की राशि हड़प ली। विद्यार्थियों ने जब नए संस्थानों में जाकर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर पहले ही आवेदन हो चुके हैं और राशि भी जारी हो चुकी है।
सीबीआई की एफआईआर में इसका उल्लेख किया गया है। जिला कांगड़ा में स्थित कुछ संस्थानों ने इस तरह की गड़बड़ी की है। विद्यार्थियों के नाम पर हरियाणा के बैंकों में फर्जी खाते खोले गए।
मामले सामने आने के बाद विद्यार्थियों ने पुलिस के साथ उच्च शिक्षा निदेशालय में शिकायत की लेकिन कहीं से ही कोई राहत नहीं मिली। इस कारण कई विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने के चलते पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा।
सीबीआई इन आरोपों के बाद अब निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है, जिनकी लचर कार्यप्रणाली के चलते विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ।
सीबीआई की एफआईआर ने बताया गया है कि जिला कांगड़ा की फतेहपुर तहसील के गांव सकोह के रजत कुमार ने बताया कि मैंने साल 2014 में लवली यूनिवर्सिटी के फतेहपुर सेंटर में दाखिला लिया।
दाखिले के समय छात्रवृत्ति देने का दावा किया गया। बताया गया कि छात्रवृत्ति आधार लिंक बैंक खाते में आएगी। रजत कुमार ने बताया कि मुझे न तो छात्रवृत्ति मिली और न ही कोई प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। इस कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
सीबीआई की टीम की चंडीगढ़ में सर्च रेड जारी है। सूत्रों ने बताया कि पंजाब के कुछ संस्थानों और चंडीगढ़ स्थित एक संस्थान से सीबीआई बुधवार को भी रिकार्ड इकट्ठा करती रही। इसे लेकर सीबीआई की टीम शिमला लौटेगी।