पोर्टल के माध्यम से की गड़बड़ियों को जांचने के लिए जांच कमेटी ने साइबर सैल से मदद लेने का फैसला लिया है। साइबर सैल से जांच करवाई जाएगी कि क्या गड़बड़ियां गलती से हुई हैं या इन्हें जानबूझ कर किया गया है। साइबर सैल की रिपोर्ट के आधार पर जांच कमेटी आगामी फैसला लेगी।
उधर, प्रारंभिक जांच के मुताबिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को खुद लेने के लिए कुछ निजी विश्वविद्यालयों ने शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की है।
पोर्टल में भी जानबूझ कर खामियां रखी गई हैं। जांच कमेटी के पास कुछ अफसरों की संलिप्तता के सुबूत भी लगे हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग के अफसरों पर शिकंजा कस सकता है।