ढाई सौ करोड़ रुपये से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई के निशाने पर अब शैक्षणिक संस्थानों के वे कर्मचारी आ गए हैं जिनके मोबाइल नंबरों को छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों के बैंक खातों से लिंक किया गया था।
जांच एजेंसी को शक है कि इन्हीं नंबरों की मदद से छात्रवृत्ति आते ही बिना छात्रों को बताए निकाल ली गई। साथ ही इन नंबरों का इस्तेमाल डमी छात्रों के नाम पर आई छात्रवृत्ति को निकालने के लिए भी इस्तेमाल होने की संभावना जताई है। इन्हीं पहलुओं को देखते हुए जांच एजेंसी अब इन मोबाइल नंबरधारकों से पूछताछ की तैयारी में है।
22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों को अब जांच टीम ने रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संस्थानों ने नोडल अधिकारी के तौर पर तैनात अधिकारी के मोबाइल नंबरों को बच्चों के बैंक खातों की जानकारी में दर्ज करा दिया। इसके बाद जितने भी लेनदेन हुए उनकी जानकारी बैंक से एसएमएस के माध्यम से बच्चों के बजाय नोडल अधिकारी को ही मिल रही थी।
सूत्रों का कहना है कि इस बात के सामने आते ही जांच अधिकारियों ने अब नोडल अधिकारियों की लिस्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो सूची तैयार होने के बाद नोडल अफसरों से जांच अधिकारी पूछताछ शुरू करेंगे। फिलहाल जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ में अपना बेस कैंप बना लिया है और वहां सीज किए दस्तावेजों की स्क्रूटिनी कर रही है।