हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट ने विभाग में बड़े गड़बड़झाले को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 के दौरान 4,500 मीट्रिक टन से अधिक जीआई पाइप की आपूर्ति में नियमों की गंभीर अनदेखी की गई। दस्तावेजों में आशंका जताई गई है कि आपूर्तिकर्ता कंपनी ने वास्तविक ट्रांसशिपमेंट के बिना फर्जी ई-वे बिल पेश किए। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के मिनट्स में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। 22 पृष्ठों की रिपोर्ट में दर्ज है कि वर्ष 2024-25 के दौरान एल-1 फर्म होने के नाते मैसर्स एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड को 4,770 मीट्रिक टन जीआई पाइप की आपूर्ति का आदेश दिया गया, जिसकी लागत 36.77 करोड़ थी। इसमें से 13.150 मीट्रिक टन (80 एमएम पीई) जीआई पाइप, जिसकी कीमत 10.19 लाख बताई, जो बिना सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि को सूचना दिए बड़सर डिवीजन को भेज दी गई।