मशोबरा सायर मेले में झोटों की लड़ाई होने की सूचना जिला प्रशासन और पुलिस को पहले दी गई थी, बावजूद दोनों महकमे खामोश बैठे रहे। झोटों की लड़ाई होने की सूचना तेरह सितंबर को मंदिर कमेटी की ओर से जिला और पुलिस प्रशासन को लिखित में दे दी गई थी बावजूद इसके डीसी और एसपी ने समय रहते कोई एक्शन नहीं लिया।
मामला जब मीडिया की सुर्खियां बना तो आनन फानन में उसी मंदिर कमेटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। जिसने इस बात की सूचना 13 सितंबर को प्रशासन को दे दी थी। इस बात की जानकारी मंदिर कमेटी तलाई मशोबरा के अध्यक्ष बालक राम ने दी। मंदिर कमेटी की ओर से इस बारे में पत्र की प्रतिलिपि जारी की है।
पत्र में मेला कमेटी अध्यक्ष बालक राम वर्मा ने उपस्थित सदस्यों को उच्च न्यायालय के 2015 के आदेशों का हवाला दिया था। जिसमें झोटों की लड़ाई पर प्रदेश में सख्ती से प्रतिबंध लगाया गया है। जिसका पालन मंदिर कमेटी ने किया है।
मामले को लेकर मेले से पहले हुई बैठक में स्थानीय विधायक अनिरुद्ध सिंह भी उपस्थित हुए। बैठक में उपस्थित कुछ लोगों ने मेले में झोटों को लड़ाने के लिए स्थानीय विधायक की अध्यक्षता में उपसमिति बनाने और झोटे लड़ाने का निर्णय। इसका मंदिर/ मेला कमेटी सदस्यों ने विरोध किया था।
मंदिर/ मेला कमेटी पिछले दो साल से सांस्कृतिक कार्यक्रम और रस्साकस्सी आयोजन करवाया रहा था। मंदिर मेला कमेटी ने निर्णय लिया कि यदि 16 सितंबर को मेले में झोटों की लड़ाई करवाई जाती है तो इस मंदिर कमेटी की कोई भी भूमिका नहीं होगी।
इसके जिम्मेवार विधायक अनिरुद्ध की अध्यक्षता बनी कमेटी/ उपसमिति होगी। मंदिर कमेटी के सभी सदस्यों का मत था कि प्रशासन मेले में झोटों को लड़ाने की अनुमति देता है तो मंदिर कमेटी मेला करवाने को तैयार है।
प्रधान बालक राम ने कहा कि उप प्रधान जीत सिंह कंवर, सचिव मोहन सिंह, कोषाध्यक्ष हरिकिशन वर्मा मशोबरा भी इस झोटों की लड़ाई के विरोध में थे। इस बारे में डीसी और एसपी को लिखित में सूचित कर दिया गया था बावजूद इसके प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और उन पर ही एफआईआर दर्ज की गई जबकि इस मामले में प्रशासन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।