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Shimla News: सतलुज पेयजल योजना का काम अधूरा, विश्व बैंक से मांगा समय

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शिमला पहुंची विश्व बैंक की टीम को पेयजल कंपनी ने सौंपा प्रस्ताव, काम पूरा करने के लिए मांगा 22 माह का अतिरिक्त समय
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कई वार्डाें में अधूरा है नई लाइनें बिछाने का काम
बैंक का तर्क, केंद्र की स्वीकृति पर मिलेगी एक्सटेंशन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना का काम पूरा करने के लिए पेयजल कंपनी ने विश्व बैंक से एक्सटेंशन (विस्तार) मांगी है। कंपनी की ओर से सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार योजना का काम पूरा करने के लिए विश्व बैंक से 22 महीने की एक्सटेंशन देने की मांग की गई है।

शिमला दौरे पर पहुंची विश्व बैंक टीम के साथ हुई बैठक में कंपनी की ओर से यह प्रस्ताव सौंपा है। विश्व बैंक का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से इस पर मंजूरी मिलने के बाद ही बैंक अपना फैसला देगा। पेयजल कंपनी ने इससे जुड़ा एक प्रस्ताव अब केंद्र सरकार को भेजा है। शिमला पहुंची विश्व बैंक की टीम शनिवार को भी इस योजना के काम की रिपोर्ट लेगी। सोमवार को यह टीम कंपनी के अधिकारियों के साथ शकरोड़ी जाकर सतलुज पेयजल योजना के काम का जायजा लेगी। सतलुज पेयजल योजना के लिए विश्व बैंक 1168 करोड़ रुपये की मदद दे रहा है। इस योजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा होना चाहिए। कंपनी ने सतलुज का पानी शिमला तो पहुंचा दिया है लेकिन शहर में प्रेशर के साथ लोगों को अभी 24 घंटे पानी की सुविधा नहीं मिली है। सिर्फ मशोबरा क्षेत्र में ही इस योजना का काम पूरा हो पाया है। बाकी 33 वार्डाें में यह काम अधूरा है। इसे पूरा करने के लिए करीब दो साल और लगेंगे। इसलिए कंपनी को एक्सटेंशन मांगनी पड़ी है। यदि एक्सटेंशन न मिली तो योजना का बजट रुक सकता है। इससे काम पूरा करवाना मुश्किल हो जाएगा।
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शहर में खत्म हुआ पानी का संकट
सतलुज नदी का पानी शिमला पहुंचने से शहर में पेयजल संकट खत्म हुआ है। राजधानी में अब लोगों को रोज पानी की आपूर्ति हो रही है। इससे पेयजल से जुड़ी शिकायतें बंद हुई हैं। गर्मियों में हर साल शहर में पानी का संकट गहरा जाता था। साल 2018 में तो शिमला में हुआ जलसंकट देश विदेश में चर्चा का विषय बना था।




विश्व बैंक को सौंप दिया है प्रस्ताव
24 घंटे पेयजल योजना का काम पूरा करने के लिए विश्व बैंक से एक्सटेंशन मांगी है। इसका प्रस्ताव विश्व बैंक टीम को सौंप दिया गया है।
-राजेश कश्यप, महाप्रबंधक पेयजल कंपनी
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