मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि मंडी मध्यस्थता योजना में सरकार मंडी में किसानों को कम दाम न मिले, इसके लिए देश में उन फसलों की खरीद करती है।
संयुक्त किसान मंच ने केंद्र सरकार की मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के बजट में कटौती कर इसे समाप्त करने की कवायद को बागवानों से धोखा बताया है। मंच ने मांग की है कि केंद्र सरकार मंडी मध्यस्थता योजना के बजट में की गई कटौती के निर्णय को तुरंत वापस ले और 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करे। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि मंडी मध्यस्थता योजना में सरकार मंडी में किसानों को कम दाम न मिले, इसके लिए देश में उन फसलों की खरीद करती है।
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इनको न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया जाता है। इनमें सेब, किन्नू, संतरा, आलू, प्याज, लहसुन, बंद गोभी, नारियल, धनिया, मिर्च, काली मिर्च, लौंग, सरसों की खरीद की जाती रही है। इन नेताओं ने कहा कि में यह योजना वर्ष 1987-88 से आरंभ की गई। वर्ष 2022 मे हिमाचल सरकार ने करीब 90 करोड़ रुपये के सेब की खरीद मंडी मध्यस्थता योजना में की। किन्नू की खरीद अतिरिक्त हैं। अभी बागवानों का सरकार के पास करीब 100 करोड़ रुपये का बकाया है।