उपनगर संजौली के लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में बने प्राइमरी स्कूल में बच्चों को भेजना अभिभावकों को सुरक्षित नहीं लग रहा। स्कूल में वर्षों से शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण शौच और लघुशंका के लिए जंगल में जाना पड़ता है। आबादी बढ़ने और लोगों की लगातार आवाजाही के कारण अब इन बच्चों को जंगलों में जाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
दिन भर 6 से 12 साल से बच्चे झाड़ियों की ओट तलाशते नजर आते हैं। अमर उजाला ने कुछ अभिभावकों से बात की और उन्हें पेश आ रही समस्याओं के बारे में जानने की कोशिश की। अभिभावकों ने कहा कि शौचालय रहित इस स्कूल में बच्चों को भेजने के बाद वे सुरक्षित नहीं समझते हैं, लेकिन कई पारिवारिक और आर्थिक मजबूरियों के कारण उन्हें बच्चों को इसी स्कूल में भेजना पड़ रहा है।
संजौली में रह रहे लायक राम के दो बच्चे बेटा और बेटी इस स्कूल में पढ़ते हैं। वे कहते हैं कि आर्थिक स्थिति की वजह से चाह कर भी वे स्कूल नहीं बदल पा रहे हैं। लेकिन अब हद पार हो गई है। स्कूल भेजने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर र्कई सवाल उठते हैं। ओम प्रकाश और ललिता देवी का संजौली में अपना व्यवसाय है। इनकी बेटी और बेटे ने प्राइमरी स्कूल में दाखिला लिया है।