अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संजौली कॉलेज से छह छात्रों के निष्कासन को वापस लेने की मांग को लेकर एसएफआई ने शुक्रवार को हिमाचल विश्वविद्यालय शिमला में प्रदर्शन किया। विवि अधिष्ठाता अध्ययन कार्यालय के बाहर जुटे कार्यकर्ताओं ने संजौली कॉलेज प्रबंधन के इस निष्कासन को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताया।
कार्यकर्ताओं ने निष्कासन को वापस लेने की मांग की और डीएस को मांगपत्र सौंपा। इकाई अध्यक्ष अंकुश और सचिव रितेश ने चेताया कि यदि छह निष्कासित छात्रों को बहाल न किया तो एसएफआई आम छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि निष्कासन छात्रों की कॉलेज प्रशासन के गलत फैसलों के खिलाफ उठने वाली आवाज और आंदोलन को दबाने का प्रयास है। कहा कि संजौली कॉलेज प्रशासन ने सितंबर माह में 6 छात्रों का अवैध निष्कासन किया। संजौली कॉलेज के छात्रावास की फीस बढ़ाने के फैसले का विरोध करने, एक छात्रा के साथ कॉलेज परिसर में हुई बदतमीजी के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों की आवाज को दबाने के लिए उन्हें गैर कानूनी तरीके से निष्कासित किया।
कॉलेज के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद इन छात्रों को हाउस टेस्ट देने की अनुमति मिल पाई। लेकिन इतना लंबा समय बीत जाने पर भी विवि प्रशासन और कॉलेज प्रशासन ने इस फैसले को वापस नहीं लिया। यह सीधे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कार्यकर्ताओं ने जामिया मिलिया इस्लामिया में किए छात्रों के निष्कासन और जामिया प्रशासन द्वारा आंदोलनरत छात्रों की निजता पर किए हमले के खिलाफ भी नारेबाजी की। कलिंगा यूनिवर्सिटी में नेपाली छात्रा की आत्महत्या पर कलिंगा प्रशासन के नकारात्मक रवैया की आलोचना की। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई सह सचिव आशीष ने कहा कि यह सभी मामले हमारे देश में छात्रों द्वारा झेले जा रहे लगातार दमन का परिणाम है। एसएफआई ने अधिष्ठाता अध्ययन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि अगर 6 छात्रों का निष्कासन बहाल नहीं किया तो उग्र आंदोलन होगा।