प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली दस से 19 साल की छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन लेने के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। राज्य सरकार छात्राओं को स्कूलों में ही सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करवाने जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय में इसको लेकर मंथन चल रहा है।
स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन के वितरण के लिए नोडल टीचर बनाए जाएंगे। इन टीचरों के माध्यम से ही वितरण होगा। वर्तमान में आशा वर्करों के माध्यम से नैपकिन छात्राओं को मुहैया करवाए जा रहे हैं। छात्राओं को स्वयं इन आशा वर्करों से संपर्क साधना पड़ता है। कई क्षेत्रों में यह योजना हांफ भी गई है। छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। इसको लेकर प्राप्त शिकायतों के बाद ही योजना को स्कूल स्तर पर लाने की तैयारी है।
छात्राओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए यह योजना चलाई गई है। इसके तहत 10 से 19 साल की छात्राओं को प्रति माह छह सेनेटरी नैपकिन का एक पैकेट उपलब्ध करवाया जाता है। छह रुपये देकर एक पैकेट मिलता है। स्कूलों में नैपकिन वितरण की योजना शुरू होने से नोडल टीचर नैपकिन के प्रयोग की सही जानकारी भी छात्राओं को उपलब्ध करवा सकेंगी।
गुप्त बीमारियों को लेकर भी छात्राएं नोडल टीचर से अपनी जिज्ञासाएं सांझी कर सकेंगी। सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करवाने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन ने निजी कंपनियों के स्कूलों में ही नैपकिन वितरण को लेकर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। जल्द ही इस बारे फैसला ले लिया जाएगा। पहले आंगनबाड़ी के माध्यम से नैपकिन दिए जाते थे। आज कल आशा वर्कर को काम सौंपा गया है। भविष्य में इस स्कूल स्तर पर लाने की योजना है।
हंसराज शर्मा, निदेशक नेशनल हेल्थ मिशन