रात तक 10 हजार श्रद्धालुओं ने किए माता के दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कालीबाड़ी मंदिर हॉल में सोमवार को अष्टमी पर पहले मां महागौरी की पूजा की गई। इसके बाद उलूलू ध्वनि (शुभ और प्रसन्नता का प्रतीक पारंपरिक ध्वनि) और ढोल-नगाड़ों के बीच विशेष संधि पूजा हुई।
मंदिर में संधि पूजा सुबह 7:25 बजे शुरू हुई। इस दौरान मां चामुंडा का आह्वान किया गया और मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की गई। विशेष पूजा के दौरान बंगाली महिलाओं ने कोलकाता से लाए गए 108 कमल के फूल मां चामुंडा को अर्पित किए। इसके साथ ही 108 दीपक जलाए गए और मां दुर्गा को शृंगार सामग्री और साड़ी अर्पित की गई। रात तक करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।
सुबह 8:13 बजे मां चामुंडा को फल, सब्जियों और मिठाइयों का भोग लगाया गया। मंदिर के पंडित जयदेव चक्रवर्ती की अध्यक्षता में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण किया और मां चामुंडा को फूल अर्पित किए। सुबह 11 बजे तक करीब तीन हजार श्रद्धालुओं ने महाकाली के दरबार में शीश नवाया। कालीबाड़ी मंदिर में मंगलवार को हवन किया जाएगा। इस दौरान सुबह 9:30 बजे महानवमी पूजा होगी जिसके बाद हवन किया जाएगा। पूर्णाहुति सुबह 7 बजे होगी। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। तारादेवी मंदिर में अष्टमी के अवसर पर सुबह 9:30 बजे हवन किया गया। सुबह 10 बजे पूर्णाहुति दी गई। इसके बाद कन्या पूजन किया गया। ढिंगू माता मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। दोपहर बाद श्रद्धालुओं को भंडारा भी परोसा गया।
सिंदूर खेला के साथ मूर्तियों का विसर्जन कल
कालीबाड़ी मंदिर के हॉल में दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए स्थापित मूर्तियों का विसर्जन बुधवार को किया जाएगा। इस दौरान सुबह 8:30 बजे मां दुर्गा की दशमी पूजा होगी। इसके बाद सुबह 10:30 बजे मां दुर्गा को विदाई देने के लिए सिंदूर खेला का आयोजन किया जाएगा। इसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके साथ सिंदूर खेलती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। दोपहर एक बजे ढोल-नगाड़ों के साथ मां दुर्गा को विदाई दी जाएगी। इसके बाद तारादेवी स्थित आईटीबीपी के तालाब में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
यह है संधि पूजा
कालीबाड़ी मंदिर के पंडित मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया कि संधि पूजा दो तिथियों के संधिकाल में की जाती है। यह पूजा अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के दौरान होती है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब मां दुर्गा ने चंड-मुंड का वध किया, तब उन्हें चामुंडा के नाम से जाना गया। इसी प्रसंग से संधि पूजा का विशेष महत्व जुड़ा है। पंडित ने बताया कि मान्यता के अनुसार देवी के उग्र रूप को शांत करने के लिए 108 कमल के फूल अर्पित किए और 108 दीपक जलाए गए थे। तभी से संधि पूजा में 108 कमल के फूल अर्पित करने और 108 दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है।