ढली और मल्याणा के सीवरेज प्लांटों से लिए थे सैंपल
हर्षित शर्मा
शिमला। शहर के ढली और मल्याणा सीवरेज प्लांट से लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट अलग-अलग आने से सैंपल लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
दोनों प्लांटों से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीपीसीबी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीम ने सैंपल लिए थे। लेकिन सीपीसीबी के सभी सैंपल जहां फेल दिखाए हैं वहीं ढली और मल्याणा प्लांट के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए सैंपल पास बताए हैं। अब इनमें से किसकी रिपोर्ट सही इस पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ढली और मल्याणा के सैंपल फेल होने के बाद पेयजल कंपनी ने सैंपलिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अश्विनी खड्ड में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर एनजीटी के आदेशों के बाद सीपीसीबी की टीम ने मल्याणा, लालपानी और ढली प्लांट से सैंपल लिए थे। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने भी सीपीसीबी की टीम के साथ सैंपल लिए थे।
एनजीटी के तय पैमानों के हिसाब से सीवरेज प्लांट से निष्कासित पानी में टीएसएस (टोटल सस्पेंडिड सॉलिड) 20 मिलीग्राम प्रति लीटर और बीओडी (बायोलोजिकल ऑक्सीजन डिमांड) 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होने चाहिए। दोनों सरकारी एजेंसियों की टीमों ने सैंपल एक ही दिन एक साथ और एक ही जगह से लिए हैं। ऐसे में रिपोर्ट में अंतर आने से पूरी सैंपलिंग प्रकिया पर सवाल उठ रहे हैं।
ये है सीपीसीबी की रिपोर्टसीपीसीबी की रिपोर्ट में मल्याणा प्लांट से छोड़े जा रहे पानी में बीओडी 37 मिलीग्राम प्रति लीटर, टीएसएस 27 मिलीग्राम प्रति लीटर है और ढली प्लांट से छोड़े पानी में बीओडी 33 मिलीग्राम प्रति लीटर निकला है। एनजीटी के पैमानों के आधार पर यह सैंपल फेल है।
ये है एचपीपीसीबी की रिपोर्ट
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में मल्याणा प्लांट से छोड़े जा रहे पानी में बीओडी 7.6 मिलीग्राम प्रति लीटर, टीएसएस 27 मिलीग्राम प्रति लीटर है और ढली प्लांट से छोडे़ जा रहे पानी में बीओडी 6.5 मिलीग्राम प्रति लीटर और टीएसएस 8.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है। एनजीटी के पैमानों के हिसाब से प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सैंपल पास हैं।
कोट
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने एक साथ एक ही दिन सैंपल लिए थे। एक रिपोर्ट में सैंपल पास हैं और दूसरे में फेल। ऐसा कैसे हो सकता है। कंपनी एनजीटी में दी गई सीपीसीबी की रिपोर्ट के खिलाफ अपील दायर करेगी। कंपनी की स्थापना के बाद से कंपनी ने जल उपचार में उत्कृष्टता के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है।
-संजय कौशल, एजीएम, एसजेपीएनएल
30 करोड़ से अपग्रेड किए हैं दोनों प्लांट
अमरुत मिशन के तहत 30 करोड़ से ज्यादा रुपये की लागत से हाल ही में मल्याणा और ढली प्लांट को अपग्रेड किया है। दोनों प्लांटों में पुरानी एएसपी की जगह नई एसबीआर तकनीक लगाई है। अपग्रेड के बाद कंपनी ने दावा किया था कि उपचार के बाद प्लांट से पीने लायक पानी निकल सकेगा। सीपीसीबी की रिपोर्ट में सैंपल फेल होने के बाद दोनों प्लांटों के अपग्रेड कार्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।