चमियाना अस्पताल के कर्मियों का आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में सेवारत कर्मचारियों को सुबह आठ से लेकर दोपहर दो बजे और रात आठ बजे तक चलने वाली शिफ्ट के लिए अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया है।
अस्पताल प्रबंधन ने जो निजी बसें हायर कर रखी हैं वह कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए कम पड़ने लगी है। इन बसों में भीड़ अधिक रहती है। सुबह के समय इन बसों से कर्मचारियों को समय से अस्पताल पहुंचाने और दोपहर की शिफ्ट में लाने तथा वापस ले जाने में दिक्कतें आ रही हैं। अस्पताल में मौजूदा समय में करीब साढ़े पांच सौ से अधिक कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनके लिए फिलहाल अस्पताल प्रबंधन ने दो निजी बसों को किलोमीटर और प्रति चक्कर किराये पर लिया है। इसका भुगतान सरकार और विभाग करता है। इसलिए यह बसें पूरे माह के लिए निर्धारित किलोमीटर की सीमा के बाद नहीं चल पातीं। इसलिए कर्मचारियों की ओर से अब अस्पताल के लिए अतिरिक्त बसें किराये पर लेकर संचालित करने की मांग उठने लगी है। चमियाना फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. यशवंत वर्मा ने सरकार और अस्पताल प्रबंधन से कर्मचारियों के लिए दो अतिरिक्त बसें चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो निजी बसें चलाई जा रही हैं, वो संजौली, आईजीएमसी या फिर दूसरी तरफ मैहली तक ही चल रही हैं जिसमें पूरा शहर कवर नहीं हो रहा है।
अपने खर्चे पर अतिरिक्त बसें चलाना संभव नहीं : एमएस
चमियाना अस्पताल के एमएस डाॅ. सुधीर शर्मा ने बताया कि जो स्टाफ बसें चल रही हैं उसका पूरा बजट सरकार से आता है। अस्पताल प्रशासन रोगी कल्याण समिति के पैसे से बसें नहीं चला सकता है। फैकल्टी की तरफ से और बसें चलाने की मांग आई है, लेकिन इसके लिए सरकार मंजूरी और बजट देगी तो ही अस्पताल प्रशासन और बसें चला पाएगा।
अस्पताल में चार शिफ्ट में आते हैं कर्मचारी
चमियाना अस्पताल में मुख्य रूप से चार शिफ्ट में कर्मचारी ड्यूटी के लिए आते हैं। इसमें सुबह की शिफ्ट आठ बजे से शुरू होती है, जो दो बजे तक चलती है। दूसरी शिफ्ट साढ़े नौ से चार बजे तक, तीसरी मिनिस्ट्रीयल स्टाफ की शिफ्ट दस से पांच बजे तक चलती। एक शिफ्ट दोपहर दो से रात आठ बजे तक चलती है। सैकड़ों कर्मचारियों के लिए सिर्फ दो बसें पर्याप्त नहीं हैं और वह समय से कर्मचारियों को अस्पताल नहीं पहुंचा पा रही हैं। फैकल्टी एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि एचआरटीसी की टैक्सी से कर्मचारी रोज सफर कर किराये का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। इनमें अधिकतर आउटसोर्स पर सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए उनके लिए टैक्सी का किराया रोज दे पाना संभव नहीं है। अस्पताल की ओर से दो और बसें कर्मचारियों को सस्ते किराया दर पर चलाई जानी चाहिए। छह हजार किलोमीटर प्रतिमाह के हिसाब तय मासिक किराये पर अस्पताल प्रबंधन बसें संचालित कर रहा है। इसका करीब साढ़े तीन लाख खर्च आ रहा है।