यह निर्णय नए प्रोजेक्टों के साथ-साथ वर्तमान में लग रहे प्रोजेक्टों पर भी लागू है। कांग्रेस ने इसी निर्णय पर मंगलवार को नियम 63 के तहत चर्चा की। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया है।
इससे प्रदेश को आर्थिक नुकसान ही होगा। विपक्ष ने पूछा कि जब अपने हक का पैसा ही सरकार नहीं वसूल रही तो वह किस हक से पंजाब-हरियाणा से रकम मांग सकती है। कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि अगले दस साल में इस निर्णय से दस हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान होगा।
कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जब हिमाचल का एसजेवीएनएल नेपाल में पावर प्रोजेक्ट बनाने के दौरान तीस प्रतिशत बिजली मुफ्त देने को तैयार है तो हिमाचल सरकार अपने प्रोजेक्टों पर मिलने वाली मुफ्त बिजली लेने से क्यों कतरा रही है।
ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में दावा है कि किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। प्रोजेक्ट लगाने और चलाने के लिए ही व्यावहारिक बदलाव किए जा रहे हैं। पिछली सरकार ने भी चिनाब बेसिन पर बने प्रोजेक्टों पर ऐसी छूूट दी थी।
तब यही विपक्ष सरकार में था तो हिमाचल के हित की बात नहीं सोची, लेकिन अब हिमाचली हितों की बात की जा रही है। जवाब के दौरान ही कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया और मांग की कि सरकार सिर्फ यह बताए कि वह ऊर्जा नीति का रिव्यू करेगी या नहीं।
इसके बाद कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। नारेबाजी के बाद कांग्रेस विधायकों ने वाकआउट कर दिया। मंगलवार को जिस तरह ऊर्जा मंत्री के बयान को पूरा सुने बिना कांग्रेस विधायकों ने हंगामा और वाकआउट किया, उससे विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल खासे नाराज दिखे।
उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर 48 मिनट चर्चा के बाद भी अगर विपक्ष खुद जवाब नहीं सुने तो यहअनुचित है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी कांग्रेस विधायकों के रवैये की भर्त्सना की।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा ऊर्जा नीति में बदलाव से हिमाचल प्रदेश को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा नीति में ऐसा संशोधन सही नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जो काम वीरभद्र, शांता कुमार और धूमल सरकारों ने नहीं किया, वह इस सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा नीति में बदलाव को यह मंजूरी कैबिनेट ने दी।
जबकि नीति में बदलाव से पहले यह मामला हाउस में लाया जाना चाहिए था। पूंजीपतियों की इस तरह से रॉयल्टी माफ करना अब तक का महाघोटाला है। हिमाचल की जनता ऐसा नहीं होने देगी।
शिलाई से कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन बोले - 757 प्रोजेक्टों को राहत दे रहे हैं। 757 की 5500 मेगावाट है। 12 प्रतिशत भी जोड़ें, जो हिमाचल को फ्री पावर मिलनी है तो 660 मेगावाट हर साल हिमाचल को इन प्रोजेक्टों से मिलनी है।
ढाई रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से इसे आंकें तो एक साल में हिमाचल को 867 करोड़ रुपये का राजस्व आएगा। 12 साल में हिमाचल को 10 हजार 404 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसलिए यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला है।