बिना रिकाॅर्ड वाले कामगार और भी हो सकते हैं मलबे में
झाड़माजरी की परफ्यूम कंपनी में जो कामगार ठेकेदार व कंपनी में पंजीकृत थे, उनका तो पता चल रहा है, लेकिन रविवार को एक ऐसा कामगार सामने आया, जिसका कहीं पर कोई रिकाॅर्ड नहीं था। वह दिहाड़ी करता था। लापता युवक विजय दुबे के पिता मोहन दुबे ने अपने बेटे के लापता होने की बात कही है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ऐसे मजदूर और भी हो सकते हैं, जो दिहाड़ी पर काम कर रहे थे। इस अग्निकांड में पहले 8 लोगों की लापता होने की सूचना थी। कई कामगार दिहाड़ी पर कंपनी में काम करते थे। यह दिहाड़ीदार यहां पर अकेले ही रहते थे। उनका कोई परिजन अभी तक सामने नहीं आया है।
बारिश में कंपनी के बाहर डटे रहे परिजन
काजल, काजल भारती, विजय दुबे, कल्पना व चंपो के परिजन बारिश में भी कंपनी के बाहर डटे हुए हैं। यह परिजन अंदर जाने की मांग कर रहे हैं। एनडीआरएफ की टीम ने कुछ लापता कामगारों के परिजनों को हाइड्रा के साथ अंदर का हाल दिखया। इसके बाद वह शांत हुए। फैक्टरी के गेट पर लापता परिजनों को जल्द खोजने की मांग कर रहे हैं।
अभी भी उठ रही आग की लपटें
फैक्टरी में तीसरे दिन भी आग नहीं बुझ पाई है। केमिकल के भरे इन ड्रमों में बीच-बीच में आग की लपटें निकल रही हैं। ज्वलनशील पदार्थ होने से पानी का भी कोई असर नहीं हो रहा है। लगातार दो दिनों से बारिश भी जारी है।
परवाणू में आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी
प्रदेश प्रवेश द्वार औद्योगिक क्षेत्र परवाणू में आग से निपटने के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। यहां छोटे-बड़े करीब 400 उद्योग हैं। आग से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग के पास अलग से पाइप लाइन भी नहीं है जिससे गाड़ियों में पानी भरा जा सके। इसके अलावा शहर के अलावा उद्योगों के पास लगे फायर हाइड्रेंट में भी पेयजल योजना की सप्लाई लाइन से पानी छोड़ा जाता है। इसमें 24 घंटे पानी नहीं रहता। इसके चलते अग्निकांड में विभाग को भारी परेशानी झेलनी पड़ती हैं। शहर में जब पानी की सप्लाई आती है उसके बाद बाद ही हाइड्रेंट में पानी आता है। शहर में 19 हाईड्रेंट हैं। इनमें भी करीब 8 खराब हैं। इस समय में शहर में सिर्फ 11 हाईड्रेंट ही काम कर रहे हैं। इनको भी 24 घंटे पानी की सप्लाई के लिए अलग से लाइन से नहीं है।
पानी सप्लाई का नियंत्रण हिमुडा के पास है। ऐसे में आपात स्थिति में पानी छोड़ने के लिए हिमुडा को कहना पड़ता है। इसके बाद ही अग्निशमन विभाग ही गाड़ी में पानी भरते हैं। इसके चलते अग्निशमन विभाग की गाड़ी भरने में समय लगता है और परेशानी भी उठानी भी पड़ती है। परवाणू उद्योग संघ के सचिव सार्थक तनेजा ने बताया कि उद्योगों के आसपास हाइड्रेंट लगने चाहिए। इन्हें पानी की भी अलग से सप्लाई मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जगह-जगह हाइड्रेंट खराब हैं। इन्हें जल्द दुरुस्त करवाया जाए।
जिला उपायुक्त को पत्र लिख कर सुझाव दिया था कि फायर हाईड्रेंट को पानी की सीधी सप्लाई की जाए। खराब फायर हाइड्रेंट को ठीक करने और अतिरिक्त हाइड्रेंट लगाने के लिए भी आग्रह किया था। परवाणू बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां पर भी कई बार आग की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में भविष्य को देखते हुए पहले ही पुख्ता प्रबंध करना जरूरी है। इस बारे में कार्रवाई करने के लिए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को उपायुक्त ने निर्देश दिए हैं।-सतीश बेरी, प्रधान, परवाणू विकास मंच