राजधानी शिमला में यातायात नियम बस ऑपरेटरों के ठेंगे पर हैं। प्राइवेट बस ऑपरेटर न तो परिवहन विभाग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और न ही निर्धारित समय पर टैक्स जमा कर रहे हैं। नियमों की धज्जियां उड़ाने में एचआरटीसी भी पीछे नहीं है।
वीरवार को आरटीओ प्रशांत देष्टा ने टीम के साथ शहर में अलग अलग स्थानों पर नाके लगाकर बसों का निरीक्षण किया। परिवहन विभाग के निर्देशों के बावजूद बसों में विशेष श्रेणी यात्रियों (वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, कैंसर पीड़ित, अपंग) को सीटें उपलब्ध नहीं करवाई गई थीं।
बसों में ड्राइवर कंडक्टर न तो वर्दी में थे और न ही नेम प्लेट लगाई थी। बसों में धड़ल्ले से ऊंची आवाज में म्यूजिक बजाकर यात्रियों को परेशान किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान परिवहन विभाग ने दो बसें भी पकड़ी।
इनका बीते कई महीनों से एसआरटी (स्पेशल रोड टैक्स) जमा नहीं किया गया था। एआरटीओ रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान 37 बसों के चालान कर 22 हजार रुपये जुर्माना वसूला।
एचआरटीसी बसों के भी चालान
कार्रवाई के दौरान एचआरटीसी की चार बसों के भी चालान किए गए। बिना वर्दी बस चला रहे चालकों और ओवरलोडिंग के चालान हुए। निरीक्षण के दौरान जब एक निजी बस में यात्रियों की टिकटें जांची गईं तो किसी भी सवारी के पास टिकट नहीं मिली। जब कंडक्टर से इसका कारण पूछा गया तो जवाब मिला, साहब हम क्या करें, मालिक टिकटें नहीं देते।