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मोहन भागवत बोले: भारत को नीचा दिखाने वालों से रहना होगा सतर्क, मुट्ठी भर लोग कर रहे संघ का विरोध

Sun, 19 Dec 2021 08:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, धर्मशाला/कांगड़ा

सार

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि वर्ष 2025 में संघ के सौ वर्ष पूरे हो जाएंगे। संघ को कड़ी मेहनत करते हुए वर्ष 2025 तक 130 करोड़ लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश में पौने सात लाख गांव हैं। अभी संघ की शाखाएं साठ हजार स्थानों पर हैं, छह लाख स्थान अभी बाकी हैं। ऐसे में अभी बहुत काम करना है।
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मां बज्रेश्वरी मंदिर में पूजा करते डॉ. मोहन भागवत। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत को नीचा दिखाने वाले जिन लोगों की मंशा पूरी नहीं हो रही है, वे हर स्तर पर देश को डुबाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा। कांगड़ा में आयोजित मंडल-बस्ती एकत्रीकरण कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि केवल मुट्ठी भर देश विरोधी लोग संघ का विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोग व संगठन अपना अस्तित्व बचाने के लिए किसी भी स्तर पर उतरकर अपना जोर लगा रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि जिस संघ के पास न तो राजनीतिक शक्ति और न ही आर्थिक संपदा के साधन थे, आज वही संघ विश्व का सबसे बड़ा संगठन बनकर उभरा है। कार्यकर्ताओं को कछुए-खरगोश की कहानी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस दौड़ में कछुए की ही जीत होती है। समय-समय पर संघ पर कई तरह के हमले हुए, हत्याएं हुईं, लेकिन कार्यकर्ताओं ने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे अत्याचार यदि किसी अन्य संगठन पर हुए होते तो पांच वर्षों में खत्म हो जाता। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि आगे और भी खतरे हैं। इसके लिए सजग रहना होगा और संघ के स्वभाव को नहीं छोड़ना है।

ऑनलाइन शाखाओं से नहीं सीख सकते संघ के संस्कार 
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि वर्ष 2025 में संघ के सौ वर्ष पूरे हो जाएंगे। संघ को कड़ी मेहनत करते हुए वर्ष 2025 तक 130 करोड़ लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश में पौने सात लाख गांव हैं। अभी संघ की शाखाएं साठ हजार स्थानों पर हैं, छह लाख स्थान अभी बाकी हैं। ऐसे में अभी बहुत काम करना है। कोरोना से समय जब सब बंद था तो ऑनलाइन शाखाएं चलाईं गईं।
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लेकिन ऑनलाइन शाखाओं में सुन तो सकते हैं, लेकिन संघ के संस्कार नहीं सीख सकते। इसके लिए हर रोज कार्यकर्ताओं को एक साथ मिलना पड़ेगा। संघ के विस्तारीकरण के लिए समय देना होगा। उन्होंने कहा कि कम से कम एक घंटा नियमित शाखा में आइए। प्रवासी कार्यकर्ता ज्यादा से ज्यादा समय दें। हर छात्र को अगले तीन वर्षों तक संघ को पूरा समय देना है। इस सूत्र पर हम काम करेंगे, ताकि देश को संपन्न बनता देख सकें।

संघ प्रचार से नहीं, स्वयंसेवी के जीवन से बढ़ता है
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ प्रचार से नहीं, अपितु स्वयंसेवी के जीवन से बढ़ता है। संघ में सब हिंदू अपने हैं। जिस भरोसे से यहां तक पहुंचे हैं, उसे मत छोड़ें और शाखा की साधना में जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि पद, मान, प्रतिष्ठा कुछ नहीं चाहिए। अपना तन, मन, जीवन समर्पित करना चाहता हूं, ताकि देश की धरती को कुछ और भी दे सकूं। भागवत ने कहा कि सेवा ही हमारा अधिकार है और इन सभी मोह आकर्षण को दूर रखने वाली आदतों को पकड़ना है। इसके लिए साधना जारी रखनी है।

हम राष्ट्रवादी हैं, जातपात पर विश्वास नहीं रखते : भागवत
हम राष्ट्रवादी हैं और जातपात पर कतई विश्वास नहीं रखते हैं। राष्ट्र एकजुट रहे, इसके लिए हम लगातार प्रयासरत रहते हैं। यह बात कांगड़ा में प्रबुद्धजनों के साथ हुई बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कही। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी कहीं पर नहीं लिखा है कि समाज को वर्गों में बांटा जाए। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख ने उपस्थित प्रबुद्धजनों को संघ का एजेंडा बताया और संघ के साथ जुड़ने के लिए भी आमंत्रित किया।

वहीं, इस बैठक के दौरान पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया, हिमाचल सरकार के चीफ सेक्रेटरी राम सुभग सिंह, तिब्बत सरकार के कई नुमाइंदों सहित करीब 50 लोग उपस्थित रहे। मेजर विजय सिंह मनकोटिया और चीफ सेक्रेटरी सहित करीब सात-आठ लोगों ने आरएसएस प्रमुख से सवाल-जवाब भी किया।

कार्यक्रम में पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने कहा कि देश में सैन्य शक्ति को मजबूत करने पर बल देना चाहिए, जिस पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक सहित अन्य सैन्य गतिविधियां सैन्य शक्ति को मजबूत करने का ही हिस्सा हैं। उन्होंने इस दौरान मोहन भागवत से सवाल किया कि संघ को तिब्बत के मसले पर भी आगे आना चाहिए तथा उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाना चाहिए।

वहीं, इस दौरान हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने भी आरएसएस प्रमुख के समक्ष खड़े होकर अपना परिचय दिया और उनसे संघ में महिलाओं की भागीदारी को लेकर बात उठाई। इस पर डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ में एक शाखा ऐसी है, जिसे महिलाएं ही संचालित कर रही हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह की उपस्थिति पर प्रबुद्ध वर्ग अचंभित हुआ।
 
मां बज्रेश्वरी का लिया आशीर्वाद
कांगड़ा में आयोजित कार्यक्रम से पहले डॉ. भागवत ने मां बज्रेश्वरी मंदिर में माथा टेका। वह पहली बार माता के मंदिर में आए। वरिष्ठ पुजारी पंडित रामप्रसाद शर्मा ने उनसे विधिवत पूजा-अर्चना करवाई। मंदिर में माथा टेकने के बाद भागवत मंदिर कार्यालय गए। मंदिर में रखी विजिटर बुक में भागवत ने लिखा - यह उनका सौभाग्य है कि मां बज्रेश्वरी के मंदिर में आए।

भागवत के आने पर कांगड़ा मंदिर में रहा कड़ा सुरक्षा पहरा
शक्तिपीठ बज्रेश्वरी मंदिर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आगमन पर बेहद कड़ा पहरा रहा। भागवत करीब आधा घंटा मंदिर में रुके। इस दौरान मंदिर के पुजारी ने भागवत को मंदिर में स्थापित सदियों पुरानी मूर्तियों के इतिहास और उनके महत्व के बारे में बताया। इस दौरान मंदिर में आए श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए बाहर खड़े होना पड़ा और भागवत के जाने के बाद ही श्रद्धालुओं ने मंदिर में देवी दर्शन किए।

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