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रोपवे कार्पोरेशन ने टेंडर किए आमंत्रित, पांच साल में काम पूरा करने का लक्ष्य
चार मार्च को खुलेंगे टेंडर, 20 फरवरी को इच्छुक कंपनियों की आपत्तियों पर दिया जाएगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। देश के सबसे लंबे रोपवे परवाणू-शिमला रोपवे के निर्माण पर 5603 करोड़ रुपये खर्च आएगा। कार्पोरेशन ने औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 38 किलोमीटर लंबे इस रोपवे से देश-विदेश के सैलानियों समेत प्रदेश के लोग एक घंटे में परवाणू से शिमला पहुंच सकेंगे। इससे लोगों के समय की बचत होगी तो वहीं ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी।
कार्पोरेशन ने इस प्रोजेक्ट के लिए 4 मार्च को टेंडर खोलने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व इच्छुक घरानों और कंपनियों की आपत्तियों के बारे में 20 फरवरी को जानकारी साझा की जाएगी। कार्पोरेशन ने पांच साल में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसका निर्माण कार्य डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मोड पर किया जा रहा है। टेंडर आमंत्रित करने से पहले प्रोजेक्ट के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और सर्वे भी पूरा हो गया है। रोपवे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने का जिम्मा टाटा कंसल्टेंसी को सौंपा था। कंपनी को इसके लिए ढाई करोड़ की राशि दी गई थी। कार्पोरेशन के मुताबिक रोपवे क्षेत्र में काम करने वाली नामी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का काम करने के लिए हामी भरी है। इस रोपवे से प्रदेश के हजारों लोग लाभान्वित होंगे तो वहीं सैलानी खूबसूरत पहाड़ों को निहारते हुए शिमला पहुंच सकेंगे।
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आठ चरणों में पूरा होगा रोपवे का काम, एक घंटे में हजारों लोग कर सकेंगे सफर
देश के सबसे लंबे रोपवे का निर्माण कार्य आठ चरणों में पूरा होगा। योजना के मुताबिक रोपवे से एक घंटे में 3,000 से 5,000 लोग सफर कर सकेंगे। इसमें परवाणू-जाबली, जाबली-डगशाई, डगशाई-बड़ोग, बड़ोग-सोलन, सोलन-करोल टिब्बा, करोल टिब्बा-आईटी सिटी वाकनाघाट, आईटी सिटी वाकनाघाट-शोघी, शोघी-तारादेवी मंदिर और तारादेवी मंदिर से तारादेवी स्टेशन होंगे। इन सभी स्टेशन के लिए उचित जमीन को चिह्नित कर लिया गया है।
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परवाणू-शिमला रोपवे के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। यह प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसे पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रोपवे सिस्टम भविष्य में हिमाचल के पर्यटन में मील का पत्थर साबित होगा।
-अजय शर्मा, निदेशक, रोपवे काॅर्पोरेशन