भारत-चीन और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाले एनएच पर बनने वाली रोहतांग टनल का निर्माण कार्य तीन साल देरी से पूरा हो पाएगा। वहीं इसकी निर्माण लागत भी 1500 करोड़ से दो हजार करोड़ पार कर जाएगी।
क्योंकि भुगर्भीय चुनौतियों ने देश की सबसे लंबी ट्रैफिक टनल के निर्माण की रफ्तार धीमा हो गई। साउथ पोटल में टनल के भीतर लगातार पानी के रिसाव और लूज स्ट्राटा ने सीमा सड़क संगठन के साथ निर्माण कंपनी के इंजीनियरों की परेशानियां बढा दी है।
हालांकि शुरूआती दौर में सुरंग की लागत करीब 1500 करोड़ रूपये आंकी गई है। जबकि पहले सुरंग निर्माण का लक्ष्य जून 2015 निर्धारित किया गया था, भुगर्भीय चुनौतियों के कारण अब यह लक्ष्य 2018 तक आगे खिसक सकती है।
टनल में हो रहा रिसाव
बताया जा रहा है कि टनल के भीतर जबरदस्त पानी रिसाव होने से साउथ पोटल की और से पिछले एक साल के भीतर महज 150 मीटर खुदाई का काम पूरा किया जा सका है। जबकि टनल के भीतर हार्ड रॉक की बजाए लूज स्ट्राटा आने से भी निर्माण कार्य की रफ्तार धीमा पड़ गया है।
इधर, रोहतांग दर्रा के नार्थ पोटल की और से सीमित संसाधनों के बावजूद सीमा सड़क संगठन और कंपनी ने सुरंग खुदाई के काम को गति दे रखा है। नोर्थ पोटल की तरफ से एक साल के भीतर लगभग 1 किमी लंबी टनल के खुदाई को अंजाम दिया गया है।
हालांकि बर्फबारी होने के कारण नोर्थ पोटल में साल भर में महज 6 माह तक ही काम हो पाता है। सूत्रों की माने तो हार्ड रॉक में एक दिन में औसतन 6 और लूज स्ट्राटा आने पर महज 2 मीटर खुदाई का काम हो पा रहा है।
2108 तक पूरा होगा निर्माण
रोहतांग सुरंग के निर्माण में तैनात एक इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पानी रिसाव और लूज स्ट्राटा के कारण साउथ पोटल में निर्माण कार्य बेहद धीमा पड़ गया है। उन्होंने माना कि इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो 2018 तक टनल का निर्माण पूरा हो पाएगा।
जबकि बीआरओ रोहतांग टनल प्रोजेक्ट के कमांडर मेजर आरएस राव ने बताया कि नार्थ पोटल में 2400 और साउथ में 2300 मीटर खुदाई का काम हो चुका है। उधर,मंडी संसदीय क्षेत्र के सांसद राम स्वरूप शर्मा ने कहा कि रोहतांग टनल देश की सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। शर्मा ने कहा कि टनल के निर्माण में और तेजी लाने के लिए वह रक्षा मंत्री अरूण जेटली से शिष्टाचार भेंट करने जा रहे हैं।