मंगलवार को रोहड़ू बाजार में वन विभाग की छह टीमों ने एकसाथ दबिश देकर तेंदुए के 86 नाखूनों, पांच दांतों और दुर्लभ पक्षियों के पंख के साथ छह ज्वेलर गिरफ्तार किए थे। वन विभाग ने पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर इनको दबोचा था, लेकिन बुधवार को छह में से पांच ज्वेलरों को अदालत से जमानत मिल गई है। बताया जा रहा है कि वन विभाग इनके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका। हालांकि, एक ज्वेलर को जमानत नहीं मिली है। उसके बाद ज्यादा मात्रा में वन्य जीवों के अवशेष मिले थे, इसलिए कोर्ट ने उसे जमानत देने से इन्कार किया और पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह सामग्री बाहरी राज्यों से तस्करी करके रोहड़ू सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में पहुंचाई जाती रही है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ ज्वेलर इन नाखूनों और दांतों का उपयोग सोने-चांदी के गहनों में सजावट या ताबीज के रूप में करते थे। कई लोग इन्हें परंपरागत मान्यताओं के तहत सौभाग्य और सुरक्षा से जोड़कर खरीदते हैं, इसलिए इन मामलों में इसे दुर्लभ वस्तु मानकर ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। अधिकारियों का कहना है कि इसके पीछे संगठित तस्कर गिरोह की भूमिका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तेंदुए जैसे संरक्षित जीवों के अंग रखना, खरीदना या बेचना गंभीर अपराध है। बताते हैं कि वन्य जीवों के अंगों से बने आभूषण, ताबीज या अन्य सामग्री खरीदने का काम लंबे समय से जारी था। पूरे प्रदेश में इस प्रकार की कार्रवाई पहली बार रोहड़ू में हुई है। जांच जारी रहने के साथ अभी और आगे खुलासे होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। डीएफओ रवि शंकर शर्मा ने पांच ज्वेलर को कोर्ट से जमानत मिलने की पुष्टि की है।