सर्वेक्षण में खुलासा, सुन्नी, तत्तपानी और चाबा में रेत जमा होने से हर साल जलस्तर बढ़ने से आ रही बाढ़
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के कारणों का पता करने के लिए एनटीपीसी ने किया सर्वेक्षण क्रॉसर अब जल्द आरंभ होगा रेत हटाने का काम
बरसात में खतरा नहीं रहेगा बाढ़ का खतरा अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सड़कों और पावर प्रोजेक्टों के लिए की गई खोदाई समेत अन्य निर्माण कार्याें के चलते सतलुज नदी में सिल्ट (रेत) की मात्रा बढ़ रही है। बरसात के दिनों में यह रेत सुन्नी, तत्तापानी और चाबा क्षेत्र में जमा हो रही है। लगातार हो रहे रेत के इस भराव से इन इलाकों में जलस्तर बढ़ गया है।
बरसात के दिनों में यह जलस्तर अब खतरा बनने लगा है। इस बार भी इन इलाकों में नदी का पानी लोगों के लिए खतरा बन गया था। सतलुज नदी को लेकर एनटीपीसी ने इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया है। इसकी बाथिमेट्री एवं सिल्टेशन रिपोर्ट अब उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप को सौंप दी है। बचत भवन में मंगलवार को इस रिपोर्ट को लेकर विशेष बैठक हुई। जिला प्रशासन ने हाल ही में सुन्नी क्षेत्र में बढ़ती सिल्ट को लेकर कोलडैम प्रबंधन को सोनार तकनीक के आधार पर बाथिमेट्री एवं सिल्टेशन सर्वेक्षण करवाने के निर्देश दिए थे। बाथिमेट्री अध्ययन पानी के नीचे की सतह की गहराई और स्थलाकृति (तल का आकार) शामिल है जिसे आसान भाषा में जल के भीतर की मैपिंग या समुद्र तल का सर्वेक्षण कह सकते हैं। यह तकनीक नदियों, झीलों और महासागरों के तल का नक्शा बनाने के लिए सोनार, इकोसाउंडर और लिडार जैसे उपकरणों का उपयोग करती है।
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उपायुक्त ने कहा कि रिपोर्ट में डिस्लिटेशन यानि रेत हटाने के सुझाव दिए हैं। प्रशासन इस दिशा में योजना बनाने जा रहा है ताकि प्रभावित क्षेत्र में एकत्रित सिल्ट को हटाया जाए। इससे पानी का जलस्तर नहीं बढ़ेगा और बरसात में खतरा भी पैदा नहीं होगा। डिसिल्टेशन को लेकर डीएफओ एफसीए अनुमति सहित अन्य नियमों के बारे में विस्तृत अध्ययन करेंगे। स्थानीय प्रशासन सारे नियमों का अध्ययन करने के बाद एसओपी बनाएगा ताकि डिसिल्टेशन की प्रक्रिया को शुरू किया जाए। इसमें कोल डैम प्रबंधन ने भी हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
तीन जोन में बांटा है क्षेत्र
आईआइटी रुड़की के माध्यम से करवाए गए सर्वेक्षण में सिल्ट के आधार पर क्षेत्र को तीन जोन में बांटा गया है। जोन एक में तत्तापानी, जोन दो में सुन्नी और जोन तीन में चाबा क्षेत्र को शामिल किया है। सर्वे के अनुसार 2014 से 2023 तक सिल्ट के एकत्रीकरण में बदलाव देखा है। जोन तीन में वर्ष 2022 और 2023 में सिल्ट का एकत्रीकरण हुआ है। इसके पीछे मुख्य तौर पर सड़क निर्माण कार्य, प्रोजेक्ट कार्य, बाढ़ आदि मुख्य कारण माने गए हैं। रिपोर्ट में साफ बताया है कि रेजेरवायर में सिल्ट का एकत्रित हुई है लेकिन सिल्ट रेजेरवायर की क्षमता से कम एकत्रित हुई है। बैठक में एडीएम लॉ एंड आर्डर पंकज शर्मा, एडीएम प्रोटोकाॅल ज्योति राणा, डीएफओ ग्रामीण अनिकेत बान्वे, एनटीपीसी हेड ऑफ प्रोजेक्ट सेशगेरी राॅव, सहायक महाप्रबंधक एनटीपीसी स्वधीन, डीजीएम अखिलेश जोशी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।