डीडीयू और आईजीएमसी की मेडिसिन तथा शिशु रोग ओपीडी में हर रोज पहुंच रहे 65 के करीब मामले
विज्ञापन
क्रॉसर
मटमैला पानी, फास्ट फूड और बाहरी भोजन बन रहा कारण
सोमवार को 30 बच्चे और 35 वयस्क पहुंचे उपकार करवाने
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात के मौसम में जलजनित (पानी से फैलने वाली) बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। राजधानी के अस्पतालों में इन बीमारियों से पीड़ित होकर न केवल बच्चे, बल्कि वयस्क और बुजुर्ग भी उपचार के लिए आ रहे हैं। इसके चलते मेडिसिन और शिशु रोग ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। हर रोज अस्पताल में 60 से 65 मरीज उपचार करवाने पहुंच रहे हैं।
दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल (डीडीयू) और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) की शिशु रोग और मेडिसिन ओपीडी में सोमवार को 30 बच्चे और 35 वयस्क उपचार के लिए पहुंचे। इनमें से हालत गंभीर होने पर कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी किया गया। सोमवार को डीडीयू में चार और आईजीएमसी में पांच मरीजों को भर्ती किया। चिकित्सकों के अनुसार यह मामले शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से आए हैं। अभी तक किसी विशेष क्षेत्र में बीमारी का क्लस्टर सामने नहीं आया है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार, मरीजों से बातचीत में सामने आया है कि पेट दर्द और संक्रमण के मामलों में मटमैला पानी, फास्ट फूड और बाहरी भोजन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बरसात के दौरान इन चीजों से परहेज करने की सलाह दी है। गौरतलब है कि बरसात और उमस भरे मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में दूषित पानी, बासी भोजन और फास्ट फूड के सेवन से पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बीते दिनों हुई बारिश के कारण कई क्षेत्रों में पानी मटमैला आ रहा है। हालांकि, शहर में पेयजल आपूर्ति करने वाली कंपनी शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है, लेकिन पानी में हल्के कण रह जाने से मटमैलेपन की समस्या बनी हुई है। पेट दर्द से पीड़ित मरीजों को चिकित्सक आवश्यक जांच करवाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि डायरिया या अन्य गंभीर बीमारियों का समय पर पता लगाकर उपचार शुरू किया जा सके।
विज्ञापन
सैंपल कलेक्शन सेंटर पर भी उमड़ी भीड़ आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल की सरकारी और क्रस्ना लैब में भी सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ रही। बीमारी का सही कारण पता लगाने के लिए चिकित्सक मरीजों को विभिन्न जांचें करवाने की सलाह दे रहे हैं। पर्ची पंजीकरण से लेकर सैंपल कलेक्शन सेंटर तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिसके कारण लोगों को अपनी बारी के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। इसमें जिन मरीजों ने दोपहर बाद सैंपल दिए, उनकी रिपोर्ट शाम 5:00 बजे तक उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके चलते उन्हें रिपोर्ट दिखाने के लिए मंगलवार को दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा।
ऐसे करें बचाव खान-पान में सावधानी बरतें, बासी भोजन से बचें उबला हुआ या शुद्ध किया हुआ पानी पिएं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें
कोट
ओपीडी में पेट दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। राहत की बात यह है कि अभी डायरिया या पीलिया का कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। फिर भी लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है। पानी को हमेशा उबालकर पिएं और बाहरी खाने से पूरी तरह परहेज करें।
मेडिसिन ओपीडी में पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बरसात के मौसम में संक्रमण तेजी से फैलता है। लोगों से आग्रह है कि वह अपनी सेहत का ध्यान रखें और कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें। -डॉ. सतीश कुमार, प्रोफेसर एवं मेडिसिन विशेषज्ञ, आईजीएमसी