सड़क चौड़ा करने के लिए पहाड़ी की कटिंग से गिरने लगे हैं पत्थर और मलबा, भूस्खलन से हो सकता है नुकसान
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आजीविका भवन की सीढ़ियों के नीचे से खिसका रहा मलबा अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में कांग्रेस भवन से लेकर लिफ्ट तक निर्माणाधीन डबल-लेन पुल को जोड़ने के लिए सर्कुलर रोड (कार्ट रोड) को दो मीटर तक चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसके लिए हुई पहाड़ी की कटिंग के बाद सोमवार सुबह हुई तेज बारिश से भूस्खलन का खतरा बन गया है।
आजीविका भवन परिसर से सब्जी मंडी को जोड़ने वाली सीढ़ियों के नीचे से मलबा खिसक रहा है। इससे भूस्खलन की संभावना बढ़ी है। यही नहीं, कटिंग किए जाने के बाद कार्ट रोड से सब्जी मंडी सड़क को भी खतरा हो गया है। इसको भी नुकसान हो सकता है। भारी बारिश के बाद आनन-फानन में ठेकेदार ने भूस्खलन वाले प्रभावित हिस्से को तिरपाल से ढक दिया है। वर्तमान में आजीविका भवन की सीढ़ियों के नीचे से लगातार मलबा और पत्थर गिर रहे हैं, जो यहां पहले हुए किसी निर्माण कार्य का लग रहा है। तेज बारिश का क्रम जारी रहता है, तो आगामी दिनों में पहाड़ी से भूस्खलन होने से कार्ट रोड तक मलबा पहुंच सकता है। इससे वाहन भी चपेट में आ सकते हैं। इस खतरे के बावजूद अभी तक आजीविका भवन की इन सीढ़ियों को आम जनता की आवाजाही के लिए खुला रखा है।
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जल्द पूरा कर दिया जाएगा कार्य
लोक निर्माण विभाग डिवीजन-3 के अधिशासी अभियंता प्रवीण वर्मा और सहायक अभियंता प्रदीप बाली ने बताया कि पहाड़ी पर रॉक बोल्टिंग का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। इसके तुरंत बाद जाली लगाकर शॉर्ट कंक्रीटिंग (शॉटक्रेटिंग) का काम शुरू किया जाएगा। इससे पहाड़ी पूरी तरह मजबूत हो जाएगी और इस सुरक्षा कार्य को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
व्यस्त कार्ट रोड पर मंडराया बड़ा खतरा
कार्ट रोड के ठीक ऊपर जिस तरह से पहाड़ी की कटिंग की गई है, वह किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। यदि यहां भूस्खलन होता है, तो इसकी चपेट में शिमला के सबसे व्यस्त कार्ट रोड से गुजरने वाले वाहन और पैदल चलने वाले लोग तथा पर्यटक आ सकते हैं। यदि समय से पहले मानसून ने पूरी रफ्तार पकड़ ली और यह निर्माण कार्य अधूरा रह गया तो पूरी बरसात यहां जान-माल का खतरा बना रहेगा।
इस चुनौतीपूर्ण कार्य को लोक निर्माण विभाग डिवीजन-तीन करवा रहा है। मशीनों से पहाड़ी की कटिंग का काम पूरा हो चुका है, अब इसे ''रॉक बोल्ट'' तकनीक से महफूज किया जा रहा है। बोल्ट लगाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इस तकनीक का इस्तेमाल भू-तकनीकी में अस्थिर, दरकती या कमजोर चट्टानों को मजबूती देने के लिए किया जाता है।पहाड़ी या चट्टान में गहरे छेद (ड्रिल) किए जाते हैं। इसके बाद उनमें लोहे की मजबूत छड़ें (बोल्ट) डाली जाती हैं।छड़ों को सीमेंट या केमिकल रेज़िन के मिश्रण की मदद से चट्टान के अंदर ही पूरी तरह लॉक कर दिया जाता है। यह तकनीक किसी भी कमजोर पहाड़ी को मलबे में तब्दील होने से बचाती है।