हालांकि संगठन ने बताया कि बैठक का मुद्दा अगले माह 17 और 18 अगस्त को धर्मशाला में होने वाली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के आयोजन की तैयारियों की रूपरेखा बनाना था। लेकिन, सूत्रों के अनुसार अंदरखाते मुख्य मुद्दा कांगड़ा में मचे सियासी हंगामे को थामना था। माना जा रहा है कि कांगड़ा में मचे सियासी हंगामे से शांता कुमार खासे नाराज हैं।
धर्मशाला में हुई महत्वपूर्ण बैठक से शांता कुमार ने भी बुलावे के बावजूद पूरी तरह किनारा कर लिया। सत्ती ने शांता कुमार को खुद फोन कर बैठक में बुलाया था। शांता पालमपुर से शाहपुर में एक शोक सभा में तो गए लेकिन यहां से 25 किलोमीटर दूर प्रदेशाध्यक्ष की धर्मशाला में बैठक में नहीं आए। यहां से शांता दोपहर को सीधा पालमपुर आ गए। जबकि धर्मशाला में बैठक शाम को थी। सूत्रों की मानें तो शांता कुमार संगठन के नेतृत्व की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं।
प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि बैठक के लिए निमंत्रण सभी विधायकों और 2017 के विस चुनाव के प्रत्याशियों को भेजा था। चूंकि सोमवार को शिमला में नए राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में भी सभी नेताओं को बुलावा आया है तो कई लोग शिमला पहुंच चुके थे। इसलिए जो नेता कांगड़ा में थे, वह बैठक में आ गए। 4 अगस्त को भी धर्मशाला में बैठक रखी गई है। इसमें प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की तैयारियों को लेकर रूपरेखा बनाई जाएगी।